नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल रेलवे स्टेशन पर मंगलवार रात विदिशा जा रहे यात्री कैलाश पाल की हार्टअटैक से मौत हो गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार रात करीब 9 बजे प्लेटफार्म-4 और 5 के बीच उनकी मौत हुई।
वे अकेले यात्रा कर रहे थे, इसलिए तत्काल स्वजन से संपर्क नहीं हो सका। घटना के बाद शव को स्टेशन से ले जाने के लिए करीब डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार रेलवे के पास अपनी एंबुलेंस भी उपलब्ध है। इसके बावजूद समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने से स्टेशन की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल है कि गंभीर स्थिति में यात्री को तत्काल मदद कैसे मिलेगी।
मदद नहीं मिली तो जिम्मेदार कौन?
रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। इनमें बुजुर्ग, बीमार और अकेले यात्रा करने वाले यात्री भी शामिल होते हैं। ऐसे में किसी यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ने पर कुछ मिनट भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि समय पर उपचार या अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था नहीं मिलती है और स्थिति गंभीर हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? मंगलवार रात हुई घटना इसी व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है।
जरूरी हो जाती है मदद
कैलाश पाल अकेले यात्रा कर रहे थे, इसलिए घटना के बाद तत्काल परिवार से संपर्क नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में रेलवे और स्टेशन प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
अकेले यात्री के साथ आपात स्थिति होने पर उसे चिकित्सा सहायता दिलाने, स्वजन की जानकारी जुटाने और शव को सुरक्षित तरीके से अस्पताल या संबंधित स्थान तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है।
जब इस बारे में रेलवे अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो वहां से कोई जानकारी नहीं मिली।
जिम्मेदारों से सवाल
- रेलवे की एंबुलेंस होने के बावजूद डेढ़ घंटे की देरी क्यों?
- आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था क्यों नहीं?
- अकेले यात्री के स्वजन से संपर्क की व्यवस्था क्या है?
- एंबुलेंस में देरी के लिए जिम्मेदार कौन?
- क्या रेलवे ने देरी की जांच की?