यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
निमोनिया, डायरिया जैसी बीमारी से 665 बच्चों की मौत
प्रदेश में निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारी से 11 माह में 0 से 12 वर्ष के 665 बच्चे काल के गाल में समा गए।
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Publish Date: Fri, 12 Dec 2014 07:08:09 PM (IST)Updated Date: Sat, 13 Dec 2014 07:37:52 AM (IST)

भोपाल (ब्यूरो)। प्रदेश में निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारी से 11 माह में 0 से 12 वर्ष के 665 बच्चे काल के गाल में समा गए। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत को लिखित जवाब में दी। उन्होंने बताया जनवरी 2014 से 15 नवंबर तक 0 से 12 वर्ष तक के निमोनिया से 128, 227 डायरिया, बुखार, हार्ट बीमारी से और 310 बच्चे अन्य बीमारी से मरे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इनमें में सबसे ज्यादा 159 बच्चे शिवपुरी में, दूसरे नंबर पर 91 देवास में और 78 बच्चे कटनी जिले में मरे हैं। उल्लेखनीय है कि शिवपुरी, देवास और कटनी प्रदेश के विकासशील जिलों में शामिल हैं, इन तीन जिलों में मात्र 11 माह की अवधि में 328 बच्चों की साधारण बीमारी से मौत होना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है।
मलेरिया से 23, डेंगू से 12 मरे
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस अवधि में मलेरिया से 23, डेंगू से 12 और स्वाइन फ्लू से पीड़ित 7 वयस्क मरीज मरे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों में मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए कॉम्बेट टीम और रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है।
मंत्री मिश्रा ने बताया कि मलेरिया पॉजिटिव के 84,494 मरीज मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा 6387 झाबुआ और 6022 बालाघाट में मिले। इसी तरह डेंगू के 1609 मरीज मिले, इसमें सबसे ज्यादा भोपाल में 538 और नरसिंहपुर में 193 शामिल हैं। वहीं स्वाइन फ्लू के 13 पॉजिटिव मरीज मिले, इसमें सबसे ज्यादा इंदौर में 7 मरीज मिले।
मंत्री ने बताया कि इनमें से किसी भी मरीज की ईलाज के अभाव में मौत नहीं हुई है। उन्होंने रावत के सवाल के जवाब में कहा कि श्योपुर में मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए दवाइयां और स्वाइन फ्लू के लिए अलग से आईसोलेशन कक्ष भी उपलब्ध हैं केवल डेंगू और स्वाईन फ्लू की जांच के लिए ब्लड सैम्पल को ग्वालियर की माईक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है।