
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल की एक विशेष अदालत ने नाबालिग के साथ छेड़छाड़ और लैंगिक हमले के एक संगीन मामले में आरोपी को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) व 15वें अपर सत्र न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने अपने फैसले में आरोपी राहुल श्रीवास्तव को दोषी करार देते हुए उसे अधिकतम दंड से दंडित किया है। साथ ही, अदालत ने पीड़िता को 50 हजार रुपये का प्रतिकर (मुआवजा) दिए जाने का भी आदेश दिया है।
मामला 25 जून 2025 का है, जब पीड़िता ने अपनी दादी और बुआ के साथ थाना हबीबगंज में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया कि आरोपी राहुल श्रीवास्तव उसके पिता का बचपन का दोस्त था, इसलिए उसका घर पर आना-जाना लगा रहता था और वह उसे "चाचू" कहकर बुलाती थी।
22 जून 2025 की रात करीब 11 बजे, आरोपित शराब के नशे में पीड़िता के घर आया था। इस दौरान उसने अकेले पाकर बच्ची के साथ अश्लील हरकतें कीं और उसका शारीरिक उत्पीड़न किया। पीड़िता के विरोध करने पर वह वहां से भाग निकली। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
अदालत में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिव्या शुक्ला और नवीन श्रीवास्तव ने मामले की पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों, तर्कों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने राहुल श्रीवास्तव को दोषी पाया।
कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 9(एम)/10 और 9(एन)/10 में सात-सात वर्ष का सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड, तथा बीएनएस की धारा 74 में पांच वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने एक विशेष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 11 वर्षीय बालिका ने जिस व्यक्ति पर भरोसा किया, उसी ने उसके साथ विश्वासघात करते हुए लैंगिक हमला किया। इससे न केवल बच्ची का संबंधों पर से विश्वास टूटा है, बल्कि उसके भावनात्मक जुड़ाव को भी गहरी क्षति पहुंची है।
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आरोपित पहले से ही वर्ष 2016 के एक हत्या (धारा 302) के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और जमानत पर बाहर था। जमानत का दुरुपयोग कर अपराध को अंजाम देने के कारण अदालत ने उसे आदतन अपराधी मानते हुए कड़ी सजा दी है।