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प्लॉट का कब्जा नहीं दिया, बुकिंग भी रद की; अब प्रमोटर को जमा 15 लाख के बदले लौटाने होंगे 33.70 लाख रुपये

प्लॉट खरीदने के बाद कब्जा नहीं मिला और बुकिंग भी बिना सूचना रद कर दी गई तो खरीदार को अब जमा रकम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

By Jitendra DahiyaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 11:34:26 AM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 11:34:26 AM (IST)
प्लॉट का कब्जा नहीं दिया, बुकिंग भी रद की; अब प्रमोटर को जमा 15 लाख के बदले लौटाने होंगे 33.70 लाख रुपये
प्रमोटर ने प्लॉट का कब्जा नहीं दिया, बाद में बुकिंग भी रद की (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. प्लाट का कब्जा नहीं दिया, बुकिंग भी रद की; लौटाने होंगे 33.70 लाख
  2. रेरा ने वत्सल्य डेवलपर्स को ब्याज समेत रकम वापसी का दिया आदेश
  3. सेजबहार के मामले में आवंटी ने वर्ष 2012 में प्लॉट बुक किया था

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्लॉट खरीदने के बाद कब्जा नहीं मिला और बुकिंग भी बिना सूचना रद कर दी गई तो खरीदार को अब जमा रकम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजी रेरा) ने ऐसे ही एक मामले में वत्सल्य डेवलपर्स सेजबहार को खरीदार की 15 लाख 9 हजार 300 रुपये की जमा राशि के साथ 18 लाख 60 हजार 956 रुपये ब्याज लौटाने का आदेश दिया है। कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपये का भुगतान करना होगा।

प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन कराने के निर्देश भी दिए हैं। दोनों मामलों में प्राधिकरण की कार्रवाई का सीधा असर उन लोगों से जुड़ा है, जो अपनी जीवनभर की बचत लगाकर प्लॉट खरीदते हैं। आदेशों से यह संदेश भी गया है कि रकम लेने के बाद खरीदार को कब्जा न देना या नियमों से बाहर जाकर प्लॉट बेचना प्रमोटर के लिए भारी पड़ सकता है।


2012 में बुक किया प्लॉट, कब्जा नहीं मिला

सेजबहार के मामले में आवंटी ने वर्ष 2012 में आवासीय प्लाट बुक किया था। वर्ष 2012 से 2015 के बीच अनुबंध के अनुसार 15 लाख 9 हजार 300 रुपये का भुगतान किया। पूरी रकम देने के बावजूद प्लॉट का कब्जा नहीं मिला। इसके बाद प्रमोटर ने बिना पूर्व सूचना बुकिंग भी रद कर दी। जमा राशि वापस नहीं मिलने पर आवंटी ने सीजी रेरा में आवेदन किया। प्राधिकरण ने दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के बाद मूल रकम के साथ ब्याज लौटाने का आदेश दिया। ब्याज की राशि 18 लाख 60 हजार 956 रुपये तय की गई।

बिना पंजीयन प्लॉट बेचने पर आठ लाख जुर्माना

दूसरे मामले में महागणपति डेवलपर्स की प्लाटेड ले-आउट परियोजना में बिना रेरा पंजीयन भूखंडों का विक्रय किया जा रहा था। सीजी रेरा ने मामले का स्वप्रेरणा से संज्ञान लेकर प्रकरण दर्ज किया। सुनवाई और दस्तावेजों की जांच में परियोजना को रेरा पंजीयन के बिना संचालित करना अधिनियम की धारा 3 का उल्लंघन पाया गया। इसके बाद डेवलपर पर आठ लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

यह भी पढ़ें- रायपुर में बिना RERA रजिस्ट्रेशन प्लॉट बेचने पर महागणपति डेवलपर्स पर 8 लाख रुपये का जुर्माना

खरीदार पहले जांचे रेरा पंजीयन

दोनों आदेशों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्लॉट खरीदारों की सुरक्षा से जुड़ा है। रेरा में पंजीयन योग्य परियोजना में बिना पंजीयन भूखंड का विज्ञापन, बुकिंग या बिक्री नहीं की जा सकती। खरीदारों के लिए जरूरी है कि प्लॉट बुक करने से पहले परियोजना का रेरा पंजीयन, प्रमोटर का नाम और परियोजना से जुड़े दस्तावेज जांच लें। वहीं रकम लेने के बाद अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार प्राधिकरण में राहत मांगी जा सकती है।