
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। संविदा कर्मचारी को संविधान नीति के तहत नियमित पदों पर संविलियन की प्रक्रिया चल रही है। 10 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मियों को इसके लिए पात्र माना गया है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने 30 जनवरी 2026 को की थी। संविदा कर्मियों को चाइल्ड केयर लीव की सुविधा नहीं है। यह नियम नियमित कर्मचारियों पर ही लागू होते हैं। संविदा नीति में भी इसका प्रविधान नहीं है। यह जानकारी राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने मंगलवार को विधानसभा में दी।
कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का विषय उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री की घोषणा का हवाला देते हुए कहा कि अब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया नहीं हुई है। कई संविदाकर्मी आज भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस पर राज्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप नियमित पदों पर संविलियन की प्रक्रिया जारी है।
इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा। संविदा कर्मियों के लिए पद सुरक्षित करने का प्रविधान है। प्रतिनियुक्ति पर संविदा कर्मचारियों को भेजे जाने का प्रविधान नहीं है। नियमित कर्मचारियों की तरह ग्रेच्युटी, अंशदायी पेंशन योजना, स्वास्थ्य बीमा, अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने की व्यवस्था है। महिला संविदा कर्मचारी को महिला शासकीय सेवकों के समान प्रसूति अवकाश की पात्रता है।
सीधी से विधायक रीति पाठक ने भूमि आवंटन के बाद भी उद्योगों द्वारा इकाइयां स्थापित न किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने ग्लोबल इंवेस्टर समिट में जिले में औद्योगिक इकाई स्थापित करने की योजना को लेकर सवाल किया, जिस पर बताया गया कि कुल आठ इकाइयों ने निवेश के प्रस्ताव दिए थे। तीन इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। जबकि, एक का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। चार इकाइयों द्वारा स्थापना में रुचि नहीं दिखाई गई है।
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मुरैना जिले के जौरा से विधायक पंकज उपाध्याय ने अपहरण से जुड़े एक मामले मामले में पुलिस जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ढाई वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है। आरोपित अभी भी फरार हैं। इस पर राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि आरोपित मुलायम सिंह सिकरवार सहित अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया जा चुका है । चालान भी प्रस्तुत कर दिया है। एसआइटी का गठन भी हो चुका है। हालांकि, लिखित जवाब में यह बताया गया कि एसआइटी के गठन का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस पर विधायक ने कहा कि प्रश्न लगने के बाद एसआइटी का गठन किया गया है।