डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव फिलहाल आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में विश्वविद्यालय फिलहाल अपने मौजूदा नाम से ही संचालित होता रहेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, नाम परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका था, लेकिन इस पर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल यह मामला लंबित माना जा रहा है। रजिस्ट्रार समर बहादुर सिंह का कहना है कि इस प्रस्ताव को शासन के पास भेज दिया गया है। शासन ही इस मामले में निर्णय लेगा। पूर्व कुलपति का यह निर्णय था, लेकिन इस प्रस्ताव को रोका नहीं गया है।
पैदल मार्च निकाल छात्रों ने किया था विरोध प्रदर्शन
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) का नाम बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ भोपाल में विरोध के स्वर देखने को मिले थे। भोपाल की सड़कों पर उतरकर सैकड़ों छात्रों और युवाओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। उन्होंने इसके खिलाफ पैदल मार्च निकाला था।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव राज्यपाल और सीएम को सौंप चुके हैं ज्ञापन
कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मोहम्मद जहीर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए राज्यपाल (कुलाधिपति), मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कार्यपरिषद द्वारा पारित इस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली देश के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके नाम को विश्वविद्यालय से हटाना उनके ऐतिहासिक योगदान का अपमान है। इसके अलावा यह संविधान की भावना के भी खिलाफ होगा
जून में कार्यपरिषद ने दी थी मंजूरी
उल्लेखनीय है कि जून की शुरुआत में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) ने संस्थान का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। प्रस्ताव सामने आने के बाद प्रदेश में इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई थी।
पहले था भोपाल विश्वविद्यालय
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी। बाद में वर्ष 1988 में इसका नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय कर दिया गया था। यह निर्णय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले क्रांतिकारी नेता मौलाना बरकतउल्ला के सम्मान में लिया गया था।
कौन थे मौलाना बरकतउल्ला?
मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने विदेश में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आजादी के पक्ष में समर्थन जुटाने का प्रयास किया।
वह गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे और विदेशी धरती पर सक्रिय भारतीय क्रांतिकारियों के महत्वपूर्ण नेटवर्क का हिस्सा थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने 1988 में विश्वविद्यालय का नाम उनके सम्मान में रखा था। वर्ष 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हुआ था।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
नाम परिवर्तन को लेकर अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है। जब तक शासन की ओर से कोई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक विश्वविद्यालय का नाम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ही बना रहेगा। फिलहाल प्रस्ताव पर निर्णय न होने से यह मुद्दा ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है।