
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। त्योहार और शादियों का सीजन शुरू होने से पहले दालों की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। भोपाल के थोक किराना बाजार में सितंबर 2025 के मुकाबले इस साल सितंबर में तुवर दाल 32 रुपये किलो तक महंगी हो गई है। वहीं उड़द मोगर के भाव में 23 रुपये और चना दाल में 8 रुपये किलो की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि तुवर में पिछले एक सप्ताह में ही करीब 10 रुपये किलो की तेजी आई है।
इससे आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के अनुसार अच्छे माल की तुवर दाल एक सप्ताह पहले करीब 119 रुपये किलो थी, जो अब बढ़कर 130 रुपये किलो हो गई है। 1 सितंबर को इसका थोक भाव करीब 111 रुपये किलो था।
यानी सितंबर की शुरुआत से अब तक 19 रुपये किलो की तेजी आ चुकी है। वहीं तुवर की भोपाल थोक बाजार में रोजाना करीब 150 क्विंटल तक मांग रहती है।
दाल- सितंबर 2025- सितंबर 2026- अंतर
तुवर- 98 रुपये- 130 रुपये- 32 रुपये
उड़द मोगर- 82 रुपये- 105 रुपये- 23 रुपये
चना दाल- 72 रुपये- 80 रुपये- 8 रुपये
हरी मूंग- 85 रुपये- 89 रुपये- 4 रुपये
मूंग मोगर- 90 रुपये- 93 रुपये- 3 रुपये
मसूर- 75 रुपये- 76 रुपये- 1 रुपये
ये भोपाल के थोक बाजार के भाव हैं।
मसूर के भाव में भले ही एक साल में सिर्फ 1 रुपये किलो की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसकी बाजार मांग काफी अधिक है। भोपाल में मसूर व अन्य टालें की रोजाना करीब 100 क्विंटन तक मांग रहती है। ऐसे में मांग और उपलब्धता में बदलाव का असर बड़ी मात्रा में कारोबार पर पड़ सकता है।
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दलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश, बुवाई और संभावित उत्पादन का असर कीमतों पर पड़ता है। भारत की आयात जरूरत के कारण म्यांमार और कनाडा जैसे देशों से आने वाली दालों की उपलब्धता, कीमत, परिवहन और लाजिस्टिक्स लागत भी घरेलू बाजार को प्रभावित करती है।
हाल में शक्कर के बाजार में सरकार के हस्तक्षेप और उपलब्धता बढ़ने से कीमतों में राहत मिली। इसी तरह दालों में भी बफर स्टॉक बाजार में उपलब्ध कराया जाए, तो बढ़ती कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल तुवर में एक साल में 32 रुपये और एक सप्ताह में 10 रुपये की तेजी ने त्योहार से पहले दालों की कीमतों को प्रमुख चिंता बना दिया है।- विवेक साहू, किराना व्यापारी महासंघ।
नवरात्रि, दीपावली और इसके बाद आने वाले शादी के सीजन को देखते हुए बाजार में पहले से स्टाक तैयार किया जा रहा है। दूसरी ओर उत्पादक राज्यों से आवक और पुराने स्टाक की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने तक बाजार में उपलब्धता अहम रहेगी।- महेश रामरख्यानी, अध्यक्ष, चावल दाल थोक व्यापारी संघ।