नगर स्तरीय अधोसंरचना विकास पर करीब 45 हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इस तरह भूमि अर्जन और नगर स्तरीय अधोसंरचना सहित कुल अनुमानित जरूरत करीब 59 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है।
क्रियान्वयन की चुनौती
योजना की असली चुनौती इसी क्रियान्वयन में है। ड्राफ्ट में पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत, भूमि का कुशल उपयोग, अधोसंरचना और सेवाओं की उपलब्धता तथा कमजोर वर्गों के आवास को प्राथमिकता देते हुए क्रियान्वयन नीति बनाने की बात कही गई है।
इस लिहाज से 2047 का ड्राफ्ट भोपाल के मौजूदा शहर को पूरी तरह बदलने के बजाय बाहर नए विकास क्षेत्रों को तैयार करने, परिवहन को उसके साथ जोड़ने और पुराने शहर को संरक्षण व पुनर्विकास के जरिए संभालने की रणनीति प्रस्तुत करता है।
हेरिटेज जोन में शामिल पुराना शहर
पुराने शहर को नए जारी हुए मास्टर प्लान के प्रारूप में हेरिटेज जोन में शामिल किया गया है। चौक, जामा मस्जिद, मोती मस्जिद, गौहर महल, जुमेराती गेट, कमला पार्क, राजभवन और अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं को संरक्षित करने की बात है।
शहर में बिछेगा 791 किलोमीटर सड़कों का जाल
शहर में 18 से लेकर 60 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कुल 791 किलोमीटर सड़कों का जाल बिछाने का प्रारूप तैयार किया गया है। शहर में 45 मीटर चौड़ी करीब 7 नए मार्ग विकसित किए जाएंगे।
इसमें नर्मदापुरम रोड, रायसेन रोड, बैरसिया रोड, विदिशा रोड, बिलकिसगंज रोड, कोलार रोड, चिकलोद रोड आदि का निर्माण किया जाएगा। 30 मीटर से अधिक चौड़े मार्गों की संख्या करीब 49 रखी गई है,जिनके बनने से शहर में यातायात सुगम होगा।
शहर में एक और आउटर रिंड का होगा निर्माण
शहर में भोपाल बायपास के अलावा अब एक और आउटर रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा। यह 83.18 किलोमीटर लंबी होगी। यह फंदा, खजुरी के बीच से शुरू होकर परविलया, ईटखेड़ी, सूखीसेवानिया, बांसिया, बगरौदा इंस्ट्रीस्टियल एरिये से होते हुए समरधा, कोलार, झागरिया जाएगी।
कोलार को जोड़ने के बाद शहर में हुए 8 उपनगर
2005 के मास्टर प्लान में भोपाल सात उपनगर में विभाजित था। यह उपनगर बैरागढ़, पुराना भोपाल, टीटी नगर, भेल, भेल एक्सटेंशन, मिसरोंद और नेवरी थे। 2047 में मिसरोद उपनगर को उप विभाजित किया गया है। कोलार को उपनगर के रूप में जोड़ा गया है। कुछ आठ उपनगर प्रस्तावित किए गए हैं।
बनेगा 51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर
नर्मदापुरम मार्ग से इंदौर मार्ग तक 51 किलोमीटर लंबे बायपास मार्ग का भोपाल विकास योजना में ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जाने का परिकल्पना की गई है।
इस कॉरिडोर की चौड़ाई 75 मीटर रहेगी। दोनो ओर 300-300 मीटर की गहराई तक का क्षेत्र अधिक धनत्व और मिश्रित उपयोग के लिए रहेगा। यहां ट्रांजिट उन्मुख विकास क्षेत्र (टीओडी) जोन बनाया जाएगा। जिसकी चौड़ाई 675 मीटर होगी।
21 साल में बने पांच ड्राफ्ट
- वर्ष 1995 में बने मास्टर प्लान की अवधि वर्ष 2005 में समाप्त हुई थी। इसके बाद अब तक मास्टर प्लान के करीब पांच ड्राफ्ट बनाए जा चुके है। इनमें से दो ड्राफ्ट जारी नहीं हुए।
- अगस्त 2005 में पहला ड्राफ्ट तैयार हुआ था, लेकिन यह जारी नहीं हो सका।
- वर्ष 2009 में दूसरा ड्राफ्ट तैयार किया गया, जिसे जारी किया गया था, लेकिन इसमें बड़े तालाब के कैचमेंट में बेहिसाब निर्माण की अनुमति जैसे प्राविधान के कारण सुनवाई के बाद इसे वापस ले लिया गया।
- वर्ष 2015 में तीसरा ड्राफ्ट तैयार हुआ, लेकिन यह भी जारी नहीं हो सका।
- मार्च 2020 में चौथ ड्राफ्ट तैया हुआ, जिसे 2023 में जारी किया गया, लेकिन सरकार के बदलने पर इस यह लागू नहीं हो सका।
- मास्टर प्लान का पांचवा ड्राफ्ट 26 सितंबर को जारी हुआ।
सीलिंग की कार्रवाई से उठी मांग
भोपाल बिना मास्टर प्लान के पिछले 21 सालों से अनियोजित तरीके से विकसित हो रहा है। इसको लागू करने की कई बार मांग भी उठी और सरकार ने ड्राफ्ट भी जारी किए, लेकिन मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका।
सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित कारोबार पर शिंकजा कसा और नगर निगम ने सीलिंग की कार्रवाई की, तब व्यापारी सीलिंग की कार्रवाई के दौरान में सड़कों पर उतर आए और मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
इसके बाद सरकार ने 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की बात कही। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी, लेकिन मास्टर प्लान को अंतिम प्रकाशन सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा।
हर भूमि निर्माण योग्य नहीं
ड्राफ्ट में 15 प्रतिशत यानी लगभग 8 डिग्री से अधिक ढलान वाले क्षेत्रों में निर्माण गतिविधि को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की गई है। करीब 1,000 हेक्टेयर भूमि को संरक्षण के तहत लाने का प्रस्ताव भी है। यह बिंदु भविष्य के रियल एस्टेट विस्तार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि भोपाल में उपलब्ध हर जमीन निर्माण योग्य नहीं है।
314 किलोमीटर क्षेत्र में नहीं सीवेज नेटवर्क
नए शहर बसाने का सबसे कठिन हिस्सा सड़क नहीं, पानी और सीवरेज होगा। ड्राफ्ट के मुताबिक मौजूदा नगर निगम क्षेत्र में करीब 314 किमी भूमिगत सीवर नेटवर्क की कमी है और लगभग 28-30 प्रतिशत आबादी ही उपलब्ध सीवरेज उपचार व्यवस्था से जुड़ी बताई गई है। 2047 तक पूरे शहर को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इस तरह बदलेगा भोपाल के विकास का पैर्टन
- मिश्रित भूमि उपयोग : नए प्लान में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति के अनुरूप सड़क की चौड़ाई के आधार पर मिश्रित भूमि उपयोग की अनुमति दी गई है। इससे कार्यस्थल और आवास का सामंजस्य बनेगा और कानूनी जटिलताएं समाप्त होंगी।
- 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कारिडोर व इकाई सिटी: शहर के बाहरी हिस्से को जोड़ने वाला 51 किलोमीटर लंबा और तीन हजार हेक्टेयर में फैला ग्रोथ कारिडोर बनेगा।
- ईकाई सीटी : भौंरी स्थित एजुकेशन हब को अपग्रेड कर देश की पहली एजुकेशन, नालेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ईकाई) सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां ग्लोबल आइटी कंपनियां, डेटा सेंटर और रिसर्च हब स्थापित होंगे।
- चौड़े मार्गों पर असीमित एफएआर व ऊंची इमारतें: निवेश आकर्षित करने के लिए चौड़े मार्गों पर एफएआर और इमारतों की ऊंचाई पर लगी पाबंदी हटा दी गई है। ग्राउंड कवरेज की पुरानी बाध्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे आर्किटेक्चरल डिजाइनिंग और ओपन स्पेस में लचीलापन आएगा।
- पुरानी बस्तियों का पुनर्विकास: घनी और पुरानी कालोनियों में 70 प्रतिशत रहवासियों की सहमति से आरडब्ल्यूए अपार्टमेंट्स का री-डेवलपमेंट करा सकेंगी।
- भानपुर खंती पर गोल्फ कोर्स और ग्रीन बफर: प्रदूषण के पुराने प्रतीक भानपुर खंती को गोल्फ कोर्स में बदला जाएगा। नए आउटर बायपास के दोनों ओर 50-50 मीटर का ग्रीन बेल्ट सुरक्षित रहेगा।
2005 से 2047: भूमि उपयोग और फैलाव का तुलनात्मक विवरण
मास्टर प्लान 2005 और 2047 (प्रारूप) के तुलनात्मक अध्ययन से पता चलता है कि भोपाल अब एक सीमित शहर से निकलकर बृहद मेट्रोपालिटन स्वरूप ले चुका है।
| विकास के प्रमुख मानक | भोपाल विकास योजना 2005 | भोपाल विकास योजना 2047 (प्रारूप) | बदलाव व प्रभाव |
| अधिसूचना वर्ष | 9 जून 1995 | वर्ष 2026 | लगभग दो दशक के अंतराल बाद जारी |
| कुल निवेश क्षेत्र | 601.06 वर्ग किमी | 1016.90 वर्ग किमी | 415.84 वर्ग किमी (करीब 69%) का बड़ा विस्तार |
| शामिल गांवों की संख्या | 146 ग्राम | 254 ग्राम | 108 नए ग्राम विकास योजना के दायरे में आए |
| प्रस्तावित जनसंख्या लक्ष्य | 18 से 20 लाख | 45 लाख (अनुमानित) | महानगर की जरूरतों के अनुसार ढांचा तैयार |
| विकास योग्य कुल क्षेत्र | सीमित नगरीय सीमा | 61,017.02 हेक्टेयर | नियोजित विकास का दायरा कई गुना बढ़ा |
| हरित क्षेत्र | लगभग 16% | 27.01% (16,489.94 हे.) | 11% से अधिक की सीधी वृद्धि |
| आवासीय भूमि उपयोग | परंपरागत जोनिंग | 43.85% (26,755.50 हे.) | अफोर्डेबल और रेंटल हाउसिंग को विशेष रियायत |
| मिश्रित उपयोग | नगण्य / प्रतिबंधित | 4.01% (2,448.84 हे.) | व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियां एक साथ |
| परिवहन व मोबिलिटी | पारंपरिक मार्ग | 9.53% (5,793.82 हे.) | 51 किमी ग्रोथ कॉरिडोर, BRTS से मेट्रो अपग्रेड |
| सार्वजनिक-अर्ध-सार्वजनिक | सामान्य प्रावधान | 8.01% (4,887.97 हे.) | संस्थागत, स्वास्थ्य व प्रशासनिक केंद्रों के लिए जमीन |
| उद्योग व लॉजिस्टिक्स | मंडीदीप केंद्रित | 4.76% (2,908.69 हे.) | नए लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग व इंडस्ट्रियल क्लस्टर |
| वाणिज्यिक व अन्य जोन | तयशुदा बाजार | 2.83% (1,732.26 हे.) | मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉर्पोरेट ऑफिस व विशेष उपयोग |
इसमें लोगों का फायदा
सस्ते मकानों पर अतिरिक्त शुल्क नहीं: अफोर्डेबल हाउसिंग और रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को अतिरिक्त एफएआर खरीदने की बाध्यता से छूट दी गई है।
ग्रीन व हेरिटेज टीडीआर: जिन भूस्वामियों की जमीनें आमोद-प्रमोद, पार्क या बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में आएंगी, उन्हें नुकसान से बचाने के लिए ग्रीन व हेरिटेज ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) दिए जाएंगे।
डिजिटल ट्विन सिटी: विकास योजना के क्रियान्वयन, ट्रैफिक जाम और अवैध निर्माणों पर पहली बार डिजिटल ट्विन सिटी तकनीक से सेटेलाइट और रियल-टाइम निगरानी रखी जाएगी।
एक्सपर्ट व्यू : सुमित गोठी, सचिव, इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर इंडिया
बायपास पर टीओडी से बढ़ेंगे हादसे, कमर्शियल दायरा घटने से व्यापार पर पड़ेगा असर
नर्मदापुरम मार्ग से इंदौर मार्ग तक 51 किलोमीटर लंबे बायपास की योजना स्वागतयोग्य है, लेकिन इस मार्ग पर ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र प्रस्तावित करना उचित नहीं है। बायपास का मूल उद्देश्य शहर में दाखिल हुए बिना भारी वाहनों और अंतर-शहरी यातायात को बाहर से ही निकालना होता है।
यदि यहां टीओडी विकसित किया गया, तो स्थानीय नागरिकों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे बायपास पर ट्रैफिक का दबाव और जाम बढ़ेगा, जिससे गंभीर सड़क हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी।
दूसरी बड़ी खामी कमर्शियल एरिया में कटौती है। वर्ष 1973 से 1994 तक मास्टर प्लान में व्यावसायिक क्षेत्र 4 प्रतिशत था, जिसे इस बार घटाकर महज 2.21 प्रतिशत कर दिया गया है।
शहर में व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार करने के लिए व्यावसायिक क्षेत्र को बढ़ाया जाना चाहिए था, न कि कम किया जाना। जिम्मेदार नियोजन वही है, जो शहर की आर्थिक गतिविधियों को विस्तार दे और सड़कों को सुरक्षित बनाए रखे।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद लंबे समय से लंबित भोपाल मास्टर प्लान का क्रियान्वयन आज शुरू हुआ, परंतु इसमें कुछ नियम अस्पष्ट है, जिससे रहवासियों के हित एवं भोपाल के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। जिसका अध्ययन करने के पश्चात हम अपनी आपत्तियां शासन एवं न्यायलाय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।- विवेक त्रिपाठी, रहवासी अरेरा कॉलोनी
नया मास्टर प्लान शहर के विकास की दिशा तय करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं जैसे अहम पहलुओं को भी बेहतर ढंग से संबोधित करती है। हमने भी नीति-पत्र तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंपा है, जिसके माध्यम से हमने कहा है कि विकास योजना केवल भूमि-उपयोग के रंग और निर्माण के नियमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें सवाल रखा गया है कि प्रस्तावित सड़क कब बनेगी, उसके लिए जमीन कैसे उपलब्ध होगी, पानी-सीवर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था कौन करेगा, बजट कहां से आएगा और नागरिक को काम की प्रगति कैसे पता चलेगी। - मनोज मीक, अध्यक्ष, क्रेडाई
मास्टर प्लान के तहत शहर में सड़क, यातायात और अन्य जरूरी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। व्यावसायिक क्षेत्रों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही व्यापार और उद्योग के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इससे शहर का विकास व्यवस्थित तरीके से होगा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। - गोविंद गोयल, अध्यक्ष, भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स
भोपाल मास्टर प्लान-47 मसौदे में सरकार के वसूली के मंसूबे नजर आ रहे हैं। तरह-तरह के शुल्क लेकर लोगों को रहवासी क्षेत्र में गैर आवासीय-कारोबारी गतिविधियों की छूट दी जा रही है। इससे रहवासी क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा समस्याएं और बढ़ जाएंगी। यह नगरों में नियोजित विकास की मान्य अवधारणा और सुप्रीम कोर्ट की मंशा के भी विरुद्ध है। सरकार ने नगर निगम की कमाई का जरिया निकाला अरेरा कालोनी 10 नंबर मार्केट के आसपास 4500 वर्गफुट भूखंड पर अधिभोग परिवर्तन शुल्क 31 लाख वसूला जाएगा, पूर्व के बिना अनुमति के परिवर्तित भूखंड पर 20 लाख और लगेंगे। मास्टर प्लान ड्राफ्ट में नगर निगम का खेला, 'शुल्क दो, छूट लो' नजर आ रही है। इससे रहवासी बस्ती रहने नहीं बिकने लायक बचेंगी। - पूर्णेंदु शुक्ला, रहवासी, अरेरा कॉलोनी
भोपाल मास्टर प्लान-2047 केवल शहर के विस्तार की योजना नहीं, बल्कि भोपाल के भविष्य की विकास यात्रा का विजन है। पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार, निवेश, आधुनिक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं पर केंद्रित यह विजन भोपाल को एक आधुनिक एवं समृद्ध शहर के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उद्योग एवं व्यापार जगत सहित सभी हितधारकों की सक्रिय सहभागिता से भोपाल मास्टर प्लान-2047 को विकास का प्रभावी रोडमैप बनाया जा सकता है। - डॉ. संजीव अग्रवाल, अध्यक्ष, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एसोसिएशन