• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

भोपाल में तेजी से बढ़ रहे डिप्रेशन के मरीज; 5 साल में दोगुना हुई संख्या, बांझपन और ऑफिस के तनाव ने बढ़ाई चिंता

32 अध्ययनों और 1.24 लाख महिलाओं के विश्लेषण में अन्य महिलाओं की तुलना में बांझपन का सामना कर रही महिलाओं में मनोवैज्ञानिक तनाव अधिक मिला।

By mukesh vishwakarmaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 03:43:52 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 03:43:52 PM (IST)
भोपाल में तेजी से बढ़ रहे डिप्रेशन के मरीज; 5 साल में दोगुना हुई संख्या, बांझपन और ऑफिस के तनाव ने बढ़ाई चिंता
शोध में सामने आया कि बांझपन से जूझ रही महिलाओं में तनाव 1.63 गुना ज्यादा।प्रतीकात्मक फोटो, इंटरनेटर मीडिया से ली गई है।

HighLights

  1. हमीदिया अस्पताल में मानसिक रोगियों की संख्या दोगुने से ज्यादा
  2. 2022 में संख्या 13,104 और 2025 में बढ़कर 18,003 हो गई
  3. बांझपन का सामना कर रही महिलाओं में मनोवैज्ञानिक तनाव अधिक मिला

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नौकरी की डेडलाइन, करियर की चिंता, रिश्तों में तनाव और संतान की इच्छा पूरी न होने का दर्द मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। बाहर से सामान्य दिखने वाले लोग भी भीतर भावनात्मक दबाव से जूझ रहे हैं। हमीदिया अस्पताल में मानसिक रोग के मरीजों की संख्या पांच साल में दोगुने से ज्यादा हो गई है।

आंकड़ों के अनुसार 2021 में 8589 मरीज आए थे, 2022 में संख्या 13,104 हो गई और 2025 में आंकड़ा 18,003 तक पहुंच गया। गांधी मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रुचि सोनी के मुताबिक मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे जागरूकता, इलाज की उपलब्धता और अस्पताल तक पहुंच जैसे कारण भी हो सकते हैं।


ऑफिस की टेंशन से घट रही वर्क कैपिसिटी

ऑफिस में टास्क पूरा करने का दबाव, लंबे काम के घंटे और नौकरी की असुरक्षा मानसिक तनाव बढ़ा रहे हैं। पंडित खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज के शोध में सात पेशों से जुड़े 16 प्रतिशत लोगों में अवसाद पाया गया। पुरुषों और महिलाओं में अनुपात समान था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तनाव से व्यक्ति की कार्यक्षमता 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है। खराब वर्किंग कल्चर से संस्थान की उत्पादकता भी प्रभावित होती है।

यह भी पढ़ें- World Suicide Prevention Day: MP में हर 1 लाख में 17 लोग क्यों दे रहे जान? जानें युवाओं में डिप्रेशन और सुसाइड के खतरनाक आंकड़े

बांझपन में महिलाओं में तनाव ज्यादा

शोध के अनुसार बांझपन से जूझ रही महिलाओं में मनोवैज्ञानिक तनाव अन्य महिलाओं की तुलना में 1.63 गुना ज्यादा पाया गया। 32 अध्ययनों और 1.24 लाख महिलाओं के विश्लेषण में यह सामने आया।

वहीं 53 अध्ययनों के विश्लेषण में महिलाओं का औसत तनाव स्कोर पुरुषों से अधिक मिला। इसमें परिवार और समाज का दबाव, मां बनने की इच्छा और यौन संबंधों को लेकर चिंता बड़े कारण हैं।