
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) से बीटेक चौथे सेमेस्टर के नौ सीलबंद प्रश्नपत्र चोरी होने के मामले में गांधी नगर थाना पुलिस ने जांच तेज कर दी है। चार दिन बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है, लेकिन जांच में कई अहम सुराग सामने आए हैं।
पुलिस को आशंका है कि अलमारी को नकली चाबी से खोला गया, क्योंकि घटनास्थल पर किसी भी ताले या दरवाजे पर तोड़फोड़ के निशान नहीं मिले। इससे मामले में अंदरूनी मिलीभगत की संभावना भी जताई जा रही है।
पुलिस का कहना है कि चोर सीधे उसी अलमारी तक पहुंचा, जहां सीलबंद प्रश्नपत्र सुरक्षित रखे गए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अलमारी की मूल चाबी तय स्थान पर रखी जाती थी। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं किसी ने उसी चाबी की डुप्लीकेट तैयार कर वारदात को अंजाम तो नहीं दिया। घटनास्थल से फिंगरप्रिंट जुटाए गए हैं और उनका मिलान परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी सहित संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों के फिंगरप्रिंट से कराया जा रहा है।
पुलिस परीक्षा शाखा से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बयान दर्ज कर रही है। हालांकि घटना वाली रात ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी से अभी पूछताछ नहीं हो सकी है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि प्रश्नपत्र चोरी से किसे लाभ हो सकता था और इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश तो नहीं है।
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरजीपीवी को अर्चना तिवारी के नैक (NAAC) प्रभारी रहने पर ही पहली बार विवि को 'A++' ग्रेड मिला था। कुछ विभागों से जुड़े अधिकारियों के बीच वर्चस्व और श्रेय लेने की खींचतान बढ़ गई थी। इसी अंदरूनी विवाद का पेपर चोरी की वारदात से कोई संबंध तो नहीं है।
गांधी नगर थाना प्रभारी बृजेंद्र मर्सकोले ने बताया कि घटना वाले दिन परिसर के सीसीटीवी कैमरे बंद मिले। पुलिस यह जांच कर रही है कि कैमरे तकनीकी खराबी के कारण बंद थे या जानबूझकर निष्क्रिय किए गए थे। वहीं खिड़की के तीन कांच टूटे हुए नहीं, बल्कि सावधानीपूर्वक हटाए गए मिले।
इससे आशंका है कि वारदात को सामान्य चोरी का रूप देने की कोशिश की गई। यदि ताला या खिड़की तोड़कर चोरी की जाती, तो सुरक्षा कर्मियों को इसकी आवाज सुनाई देना स्वाभाविक था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यूटीडी के डायरेक्टर प्रो. सुधीर भदौरिया के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी को सोमवार को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया था, लेकिन वे समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुईं।
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कुलपति प्रो. आलोक शर्मा ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा शाखा को एक ही स्थान पर संचालित किया जाएगा। प्रश्नपत्रों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे और गोपनीय प्रश्नपत्रों को डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएंगे।