RIE भोपाल की 'आठ पहर' डिजिटल घड़ी को मिला पेटेंट, Gen-Z को पारंपरिक समय-ज्ञान से जोड़ेगी अनूठी क्लॉक
डिजिटल वॉल क्लॉक का डिजाइन पेटेंट क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई), भोपाल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और उनके सहयोगी विवेक यादव ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 07:18:43 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 07:18:43 PM (IST)
भोपाल के आरआईई के डॉ. रजत और मनीष की ‘आठ पहर’ वाली अनूठी डिजिटल क्लॉक को मिला पेटेंट। फोटो- स्वयंHighLights
- भोपाल के आरआईई की ‘आठ पहर’ वाली डिजिटल वॉल क्लॉक को भारत सरकार से डिजाइन पेटेंट मिला
- डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और विवेक यादव के नाम दर्ज हुआ डिजाइन पेटेंट नंबर 494340-001
- भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को गणितीय शिक्षा और आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ने का अभिनव प्रयोग
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। तकनीक के बदलते दौर में घड़ी की सुइयां भले ही आधुनिक समय के हिसाब से चलती हों, लेकिन अब एक अभिनव डिजिटल वॉल क्लॉक भारतीय परंपरा में समय को समझने का नया जरिया बनने जा रही है।
भारतीय समय-गणना की प्राचीन ‘आठ पहर’ वाली अवधारणा पर तैयार डिजिटल वॉल क्लॉक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट मिल चुका है।
भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाले इस अनूठे प्रयोग को आधिकारिक पहचान मिलना, गणितीय एवं शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. रजत और मनीष की अनूठी डिजिटल क्लॉक
इस डिजिटल वॉल क्लॉक का डिजाइन पेटेंट क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई), भोपाल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और उनके सहयोगी विवेक यादव के नाम दर्ज है।
इसके लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय ने 8 सितंबर को रजिस्टर्ड डिजाइन नंबर 494340-001 और पेटेंट सर्टिफिकेट जारी किया है। डिजाइनरों के मुताबिक, यह रजिस्ट्रेशन क्लास 10-01 के अंतर्गत 'DIGITAL WALL CLOCK' के लिए किया गया है।
भारतीय समय-ज्ञान को आधुनिक रूप देने का प्रयास
'आठ पहर' भारतीय पारंपरिक समय-विभाजन की प्राचीन और सर्वमान्य अवधारणा है। दिन और रात के 24 घंटों को अलग-अलग पहरों में बांटकर समय को समझने की यह परंपरा भारतीय ज्ञान प्रणाली का हिस्सा रही है। इसी कॉन्सेप्ट को आधुनिक डिजिटल क्लॉक के रूप में पेश करने का प्रयास, इस डिजाइन की सबसे बड़ी विशेषता है।
डिजाइन के आविष्कारक डॉ. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा ने बताया कि इस नवाचार का उद्देश्य केवल समय बताने वाली घड़ी बनाना नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को आधुनिक शैक्षिक और तकनीकी माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।
उनका मानना है कि यह घड़ी जेन जी युवाओं और विद्यार्थियों के लिए समय की गणितीय समझ विकसित करने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से रू-ब-रू होने का जरिया बनेगी।
एजुकेशन फील्ड में भी बहुउपयोग होने की संभावना
'आठ पहर' वाली डिजिटल घड़ी का यह डिजाइन गणित की बारीकियां समझने, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और नए शैक्षिक संसाधन तलाशने में काफी मददगार हो सकती है। जिससे छात्र-छात्राएं बड़ी आसानी से पारंपरिक समय-विभाजन, गणितीय गणनाओं और आधुनिक समय-प्रणाली के बीच संबंध को समझ पाएंगे।
डिजिटल वॉल क्लॉक के डिजाइनरों ने कहा कि इस तरह के नवाचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुभवात्मक शिक्षा और नवाचार को दी गई प्राथमिकता के अनुरूप हैं। यह पेटेंट शिक्षकों और शोधकर्ताओं को भारतीय अवधारणाओं पर आधारित नए शैक्षणिक उपकरण विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।