गुरुवार को राजधानी में मनाई जाएगी ऋषि पंचमी, पूजा-अर्चना होगी
भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। इसे गुरु पंचमी भी कहते हैं।
By Lalit Katariya
Edited By: Lalit Katariya
Publish Date: Thu, 01 Sep 2022 06:02:00 AM (IST)
Updated Date: Thu, 01 Sep 2022 06:02:26 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी में एक सितंबर को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी पूजा-अर्चना के साथ सप्तर्षियों का स्मरण किया जाएगा। भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। इसे गुरु पंचमी भी कहते हैं। यह व्रत शास्त्रों में सप्तर्षि के रूप में सम्मानित सात महान ऋषियों को समर्पित है धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों का सधो मन से स्मरण करके पूजा-अर्चना करता है उसे जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही मान्यता है कि महिलाओं द्वारा यदि महामारी के दौरान कोई भूल हो जाती है, तो ऋषि पंचमी का व्रत और सप्त ऋषियों की पूजा करने से उस भूल का दोष समाप्त हो जाता है तथा जीवन में सुख-शांति आती है।
यह है ऋषि पंचमी कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक ब्राह्म्ण अपनी पत्नी के साथ रहता था, उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह सुयोग्य लड़के के साथ कर दिया, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उसके पति की अकाल मृत्यु हो गई। इसके बाद उसकी पुत्री मायके आ गई। एक दिन उसकी पुत्री अकेले सो रही थी, तभी उसकी मां ने देखा की बेटी के शरीर पर कीड़े उत्पन्न हो रहे हैं। यह बात उसने अपने पति को बताई। ब्राह्मण ने ध्यान लगाने के बाद देखा कि पूर्वजन्म में उनकी पुत्री ब्राह्मण की पुत्री थी। मासिक धर्म के दौरान उसने पूजा के बर्तन छू लिए थे। इस वजह से उसे यह कष्ट मिल रहा है। इससे छुटकारा पाने के लिए बेटी ने पिता के कहे अनुसार पंचमी का व्रत किया। इससे कष्ट दूर हो गए। यही वजह है कि ऋषि पंचमी का व्रत रखने एवं कथा सुनने से लोगों के कष्ट दूर होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है।