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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 15, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हिंदी को ज्ञान-विज्ञान की भाषा बनाएं: अनिल जोशी

हिंदी भवन में हिंदी भाषा एवं साहित्य उत्सव प्रारंभ भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। आज इस बात की आवश्यकता है कि हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और कामकाज की भाषा बनाय...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Tue, 15 Sep 2020 04:13:01 AM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2020 04:13:01 AM (IST)
हिंदी को ज्ञान-विज्ञान की भाषा बनाएं: अनिल जोशी

हिंदी भवन में हिंदी भाषा एवं साहित्य उत्सव प्रारंभ

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। आज इस बात की आवश्यकता है कि हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और कामकाज की भाषा बनाया जाए। यह बात केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के उपाध्यक्ष अनिल जोशी ने हिंदी भवन द्वारा आयोजित हिंदी भाषा एवं साहित्य उत्सव के अवसर पर कही। 'हिंदी के विकास की दिशाएं' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल ने कहा कि अनुवाद के माध्यम से बहुत बड़ा कार्य तकनीकी, विज्ञान और वित्त क्षेत्र में हुआ है। इसे प्रचारित करने की आवश्यकता है। भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉ. भगवान सिंह ने संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की व्यापकता को रेखांकित किया। चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के डॉ. नवीन लोहनी ने हिंदी में रोजगार के विविध क्षेत्रों में संभावनाओं को उजागर किया। यूके हिंदी समिति, लंदन के संरक्षक पद्मेश गुप्त ने ब्रिटेन में हिंदी के विस्तार एवं हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार की जानकारी दी। शुरूआत में हिंदी भवन के उपाध्यक्ष रघुनंदन प्रसाद शर्मा एवं मंत्री-संचालक कैलाशचंद पंत ने प्रतिज्ञा पत्र का वाचन सदस्यों को करवाया। श्री पंत ने कहा कि हिंदी दिवस परंपरा का निर्वाह नहीं अपितु संकल्प दिवस है। कार्यक्रम का संचालन हिंदी भवन के निदेशक डॉ. जवाहर कर्नावट ने किया। कार्यक्रम हिंदी भवन में हुआ, जिसमें बाहरी वक्ता ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।