
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीदी में 250 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। ई-नगर पालिका पोर्टल और GeM पोर्टल के आंकड़ों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से विश्लेषण करने पर खरीदी में बड़े पैमाने पर अंतर मिला, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। मामले में प्रदेश के 392 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। लोकायुक्त जांच शुरू हो चुकी है।
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे इस गड़बड़ी को लेकर लगातार कार्रवाई को सामने रख रहे हैं, लेकिन हमेशा ही बयानों में रहने वाले प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की पूरे मामले में चुप्पी हैरान करने वाली है। हालांकि विभाग की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है।
जिस विभाग में लगभग तीन साल में इतनी व्यापक गड़बड़ी हुई हो, उसके ही कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय यह बताने के लिए भी आगे नहीं आ रहे हैं कि गड़बड़ी कैसे हुई और आगे इसे रोकने के लिए विभाग क्या करेगा। यह हाल तब है, जब इंदौर के भागीरथपुरा की तरह यह मामला देशभर में चर्चा में है, क्योंकि प्रदेश के किसी विभाग में पहली बार खरीदी में अनियमितता पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।
नईदुनिया ने मामले में बात करने के लिए विजयवर्गीय के मोबाइल पर फोन किया, वाट्सएप पर मैसेज किया, पर कोई जवाब नहीं मिला। कांग्रेस मामले में सरकार को घेर रही है। विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त भी मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जांच कर रही है। इसके बाद सरकार का पक्ष रखने के लिए मंत्री सामने नहीं आए हैं। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल में भोपाल में हुई नगर निकाय के अधिकारियों की एक कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस गड़बड़ी को सामने रखा था।
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों से जुड़े प्रश्न पर मंत्री विजयवर्गीय भड़क गए थे। उसके बाद से भागीरथपुरा मामले में उन्होंने मीडिया से बात बंद कर दी थी। सोमवार को वह भोपाल पहुंचे और कुछ देर के लिए भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में पहुंचे, लेकिन मीडिया से दूरी बनाए रखी। इंदौर पहुंचे तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर तो प्रतिक्रिया दी, लेकिन निकायों में भ्रष्टाचार पर मौन ही बनाए रखा।