मनरेगा का ₹6,000 करोड़ बकाया: MP में थमी विकास कार्यों की रफ्तार, सप्लायरों का भुगतान अटका
मध्य प्रदेश में पूर्ववर्ती मनरेगा के पूरे हो चुके और जारी कार्यों का करीब छह हजार करोड़ रुपये का भुगतान केंद्र सरकार से लंबित है।
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 06:17:28 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 06:17:28 PM (IST)
HighLights
- करीब छह हजार करोड़ रुपये का भुगतान केंद्र सरकार से लंबित है
- निर्माण सामग्री सप्लायरों और एजेंसियों का भुगतान अटका
- वीबी-जी राम-जी के तहत प्रदेश में करीब 10 हजार कार्य स्वीकृत
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी वीबी- जी राम जी लागू हुए तीन माह होने जा रहे हैं लेकिन प्रदेश में पूर्ववर्ती योजना मनरेगा के अंतर्गत पहले हो चुके और वर्तमान में चल रहे कार्यों का करीब छह हजार करोड़ रुपये का भुगतान नहीं मिला है।
यह राशि केंद्र सरकार से मिलनी है। इसमें बड़ी राशि निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री से संबंधित है।
धीमी हुई विकास कार्यों की रफ्तार
भुगतान नहीं मिलने के कारण कई कार्यों की गति धीमी हो गई है, जबकि कुछ काम बंद भी हो गए हैं। लंबित राशि जारी करने के लिए राज्य शासन की ओर से केंद्र सरकार से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश से अधिकारियों की टीम भी दिल्ली गई थी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी इस मामले में शीघ्र ही केंद्र के अधिकारियों से भेंट करने वाले हैं। केंद्र सरकार से प्रदेश को कुछ राशि मिलने की संभावना है, लेकिन एक साथ पूरी छह हजार करोड़ रुपये की राशि मिलने के आसार कम हैं।
बढ़ी सप्लायरों की मुश्किलें
सामग्री मद का भुगतान अटकने से संबंधित कार्यों में लगे आपूर्तिकर्ताओं और एजेंसियों को भी भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। प्रदेश में वर्तमान में मनरेगा के अंतर्गत सवा 5 लाख से अधिक कार्य चल रहे हैं।
इनमें करीब तीन लाख 40 हजार कार्य आवास से संबंधित हैं। इन कार्यों में मजदूरी के साथ सामग्री पर भी राशि खर्च होती है। सामग्री मद का भुगतान लंबित होने से निर्माण से जुड़े कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।
वीबी-जी राम-जी के 10 हजार कार्य ही स्वीकृत
उल्लेखनीय है कि मनरेगा के स्थान पर लागू किए गए विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम-जी के अंतर्गत प्रदेश में अभी करीब 10 हजार कार्य ही स्वीकृत हुए हैं।
दूसरी ओर, मनरेगा के तहत पहले से स्वीकृत और चल रहे कार्यों का भुगतान भी लंबित है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की गति बनाए रखना राज्य सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
वीबी-जी राम-जी में भुगतान की शर्तें और कठिन हैं। इसमें गड़बड़ी रोकने के लिए श्रमिकों के साथ के काम के सत्यापन की प्रक्रिया कठिन कर दी गई है।
श्रमिकों का ई-केवायसी जब तक सत्यापित नहीं होगा उन्हें भुगतान नहीं किया जाएगा। नई योजना प्रारंभ होने के कारण शासन का लक्ष्य है कि मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाए, पर भुगतान लंबित होने से कार्यों में देरी हो रही है।