भोपाल(राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में अब व्यापक स्तर पर चंदन की खेती की जाएगी। यह जिम्मेदारी वन विभाग संभाल रहा है। विभाग ने प्रदेश के चार जिलों में दो सौ हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर ली है। जिस पर चंदन के पौधे रोपे जाएंगे। इन जिलों ने अपनी कार्ययोजना तैयार कर विभाग को भेजी थी। इस आधार पर विभाग ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। विभाग ने एक लाख रुपये हेक्टेयर की दर से संबंधित जिलों को राशि आवंटित कर दी है। इस राशि से जिले पौधारोपण करेंगे। इसके बाद भी राशि की जरूरत पड़ी, तो विभाग देगा। उल्लेखनीय है कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश में चंदन की खेती को बढ़ावा देने को कहा था।

चंदन की खेती के लिए सागर, उज्जैन, सिवनी और नीमच जिलों में भूमि चिह्नित की गई है। इनमें से सागर जिले में पहले से चंदन उगाया जा रहा है। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश में आमतौर पर लाल चंदन होता है। इसे ही प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा अन्य प्रजाति (जिनकी बाजार में मांग है) के पौधे भी प्रयोग के तौर पर लगाए जाएंगे। यदि उन्हें उगाने में सफलता मिलती है, तो उनकी भी व्यापक स्तर पर खेती की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पैदा होने वाले चंदन का तना ठोस नहीं होता है। जिससे घिसने योग्य लकड़ी कम निकलती है। यही कारण है कि बाजार में इस चंदन की ज्यादा मांग नहीं है।

मुरैना में की जाएगी गुग्गल की खेती

बाजार में गुग्गल की काफी मांग है और भिंड, मुरैना, ग्वालियर और श्योपुर में इसके अनुकूल भूमि भी है। इसलिए विभाग ने प्रयोग के तौर पर मुरैना में 22 हेक्टेयर भूमि का चयन किया है। इसमें गुग्गल के पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए मुरैना की जागृति संस्था से 30 रुपये प्रति पौधे की दर से 10 हजार पौधे भी खरीदे जाएंगे। यह संस्था पौधे देने के साथ उन्हें रोपने, उनकी देखरेख और पौधों से गुग्गल निकालने में भी मदद करेगी।

चंदन और गुग्गल की खेती की कार्ययोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। हमने संबंधित जिले के अधिकारियों को पौधे रोपने के लिए राशि भी आवंटित कर दी है। - सुनील अग्रवाल, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक मध्य प्रदेश

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