
भोपाल। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि मनमानी फीस और कोर्स संबंधी शिकायतें सीबीएसई स्कूलों में ज्यादा हैं। ऐसे स्कूलों पर राज्य शिक्षा अधिनियम लागू कर उनकी मान्यता खत्म कराएंगे। मिशनरी स्कूल भी पथ से भटक गए हैं। प्ले स्कूलों के लिए नियम कानून बनाए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कानूनगो ने बताया कि इस मुद्दे पर आयोग ने राज्य सरकारों को अपनी सिफारिश भेजी है। एनसीईआरटी के अलावा स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलाने एवं मनमानी फीस वसूलने पर स्कूलों की मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य शिक्षा अधिनियम को सख्ती से लागू कराया जाएगा। राज्य बाल आयोग अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र भी उनके साथ मौजूद थे।
एलीट वर्ग को शिक्षा दे रहे मिशनरी स्कूल
कानूनगो ने कहा कि धार्मिक शिक्षा देने के लिए पंजीबद्ध स्कूलों के मामले में भी कानून को सख्ती से लागू कराया जाएगा। मिशनरी स्कूल पथ से भटक गए हंै गरीबों के बजाए 'एलीट वर्ग" को ही शिक्षा दे रहे हैं। 'आरटीई" से बचने के लिए वे नियमों की आड़ नहीं ले पाएंगे। यदि दूसरे धर्म के बच्चे को यदि धार्मिक शिक्षा दे रहे हैं तो उसके अभिभावक की स्वीकृति भी देनी होगी।
स्कूल प्रबंधन पर होगी कार्रवाई
भोपाल के किड्जी स्कूल में बच्ची के साथ हुई ज्यादती के सवाल पर कानूनगो ने बताया कि इस संबंध में आयोग ने सरकार को अपनी सिफारिशें भेजी हैं। इस तरह की घटना के मामले में अब स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। 'प्ले स्कूल" खोलने के लिए आयोग ने रेगुलेटरी गाइड लाइन भी बनाई है। इस संबंध में बच्चों की सुरक्षा एवं समुचित विकास को लेकर कानून बनाए जाएंगे।