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मैट्रिमोनियल साइट पर जीवनसाथी की चाह बनी ठगी की राह, ‘वेरिफाइड प्रोफाइल’ भी सुरक्षित नहीं

साइबर पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में अपराधी खुद को एनआरआई, डॉक्टर, इंजीनियर या किसी बड़ी कंपनी में काम करने वाला बताकर संपर्क करते ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 17 Nov 2025 12:36:36 PM (IST)Updated Date: Mon, 17 Nov 2025 01:23:52 PM (IST)
मैट्रिमोनियल साइट पर जीवनसाथी की चाह बनी ठगी की राह, ‘वेरिफाइड प्रोफाइल’ भी सुरक्षित नहीं
कभी भी अपनी निजी जानकारी, ओटीपी, बैंक डिटेल्स साझा न करें। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. प्रोफाइल की जांच कर एप में सुरक्षा सेटिंग्स चेक करें।
  2. जल्दी विश्वास न करें और लोकेशन शेयर करने से बचे।
  3. फ्रॉड की स्थिति में तुरंत साइबर सेल या पुलिस को सूचित करें।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। ऑनलाइन जीवनसाथी की तलाश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी तेजी से बढ़ रही है। मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और ऐप्स पर जीवनसाथी की तलाश कर रहे भोपाल के लोग ठगों के आसान निशाने बन रहे हैं। ये ठग ‘वेरिफाइड प्रोफाइल’ बनाकर भरोसा जीतते हैं और मेडिकल इमरजेंसी, कस्टम क्लीयरेंस या विदेश से लौटने के बहाने पैसे ऐंठते हैं।

साइबर सेल के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में वर्ष 2024 में जहां 521 साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 की केवल पहली छमाही में ही लगभग 800 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। आंकड़ों से साफ है कि इस वर्ष ऑनलाइन शादी-ठगी के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है।


लोग ‘वेरिफाइड बैज’ पर कर रहे भरोसा

शादी के सीजन में मैट्रिमोनियल साइट्स का उपयोग बढ़ा है, लेकिन ‘वेरिफाइड प्रोफाइल’ का भरोसा खतरा बन रहा है। कई प्लेटफार्म सिर्फ दस्तावेज अपलोड और मोबाइल ओटीपी से ही केवाइसी पूरी मान लेते हैं, जबकि असली नौकरी, शिक्षा या पासपोर्ट की जांच नहीं होती। एल्गोरिथम आधारित वेरिफाइड बैज से प्रोफाइल आसानी से पास हो जाते हैं। इसी कमी का फायदा उठाकर ठग एनआरआई या डॉक्टर बनकर शहर के लोगों को निशाना बना रहे हैं। - भोपाल साइबर सेल के हेमराज सिंह चौहान

अकेली रह रही महिलाओं का बनाया जा रहा निशाना

भोपाल में आईटी सेक्टर और निजी नौकरियों में लगे युवाओं के कारण ऑनलाइन रिश्तों की तलाश तेजी से बढ़ी है। शहर में अकेले रहकर नौकरी करने वाली महिलाओं को ज्यादा टारगेट किया जाता है। वहीं, परिवार भी तेजी से मैचिंग पाने के लिए जल्दी भरोसा कर लेते हैं। - प्रो. शिवम् वर्षी, साइबर एक्सपर्ट

भोपाल के केसों में एक जैसा पैटर्न

साइबर पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में अपराधी खुद को एनआरआइ, डॉक्टर, इंजीनियर या किसी बड़ी कंपनी में काम करने वाला बताकर संपर्क करते हैं। वीडियो कॉल कम करते हैं, लेकिन चैट पर भावनात्मक तरीके से नजदीकियां बढ़ाते हैं। कई मामलों में भोपाल की महिलाओं से 2–5 लाख रुपये तक ठगे गए हैं।टीटी नगर की एक पीड़िता ने बताया कि एक विदेशी डॉक्टर ने वेरिफाइड प्रोफाइल दिखाकर भरोसा जीता और मेडिकल इमरजेंसी का हवाला देकर पैसे ले लिए और नंबर ब्लॉक कर दिया।

इन बातों का रखें ध्यान

  • डेटिंग प्रोफाइल पर फोन नंबर, एड्रेस, कॉलेज, वर्कप्लेस जैसी निजी जानकारी शेयर न करें।
  • प्रोफाइल की जांच कर ऐप में सुरक्षा सेटिंग्स चेक करें।
  • जल्दी विश्वास न करें और लोकेशन शेयर करने से बचे।
  • लिंक या फाइल्स पर क्लिक न करें
  • ऐप को ऑफिशियल स्टोर से डाउनलोड करें
  • कभी भी अपनी निजी जानकारी, ओटीपी, बैंक डिटेल्स साझा न करें।
  • पहली मुलाकात पब्लिक प्लेस पर ही करें।
  • संदिग्ध व्यवहार या फ्रॉड की स्थिति में तुरंत साइबर सेल या पुलिस को सूचित करें।

केस 1 : पहले विश्वास जीता, फिर पैसों की मांग की

शहर के 28 वर्षीय युवक ने बताया कि एक डेटिंग एप पर पिछले 5 महीने से उनकी एक युवती से बातचीत हो रही थी। काफी अच्छी बातचीत हुई, उन्होंने शादी तक तय कर ली थी। युवती ने एक दिन युवक को यह कह कर 98,000 रुपये की मांग कि की उन्हें अर्जेंट किसी को ऑनलाइन पैसे भेजने है और अभी अकाउंट में है नहीं। पैसों के ट्रांजेक्शन के कुछ ही घंटो में युवती का कॉल, सोशल मीडिया अकाउंट सब बंद हो गया। पता और जानकारी भी युवती ने नकली दी थी।

केस 2 : शक होने पर दर्ज की शिकायत

सलैया स्थिति 26 वर्षीय युवती बताती है कि डेटिंग एप पर काफी समय से उनकी एक युवक से बातचीत थी। कुछ समय बाद युवक ने युवती को एक लिंक भेजा और उसपर रजिस्टर करने के लिए बोला, युवती के पूछने पर उसे यह बताया गया कि वह उसके बिजनेस का हिस्सा है। युवती ने रजिस्टर करने से मना कर दिया। लगातर युवक युवती पर दबाव बनाता रहा, उसके साथ झगड़ा किया, अपशब्द इस्तेमाल किए। युवती को शक हुआ उसने युवक को हर जगह से ब्लॉक किया और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई।