
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एक तरफ तो पर्यटन विभाग प्रदेश की नदियों, तालाबों और झीलों को जल पर्यटन का केंद्र बनाना चाहता है, दूसरी तरफ सरकारी एजेंसियों की लापरवाही चरम पर है। भोपाल के बड़े तालाब में जल विहार कराने वाली 120 नावें बिना लाइसेंस के चल रही थीं। उनमें से कई में सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई थी। नगर निगम के अधिकारियों ने कभी इस अनदेखी की जांच ही नहीं की। बरगी डैम में पर्यटकों से भरी क्रूज के डूबने के बाद नाव, स्टीमर और क्रूज संचालन वाले जल स्रोतों में सतर्कता बरती जा रही है।
नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ ने भी बड़ा तालाब में नावों की जांच की तो पता चला कि 2024 के बाद से उनका लाइसेंस ही नवीनीकृत नहीं हुआ। वहीं कई नावें अधूरे सुरक्षा इंतजामों के साथ संचालित हो रही थीं। नगर निगम के अधिकारी सोमवार को बोट क्लब पहुंचे तो उन्होंने नावों की जांच की। पता चला कि अधिकतर के पास लाइफ जैकेट इतने पुराने हैं कि उससे सुरक्षा का केवल भ्रम पाला जा सकता है। उसके बेल्ट टूटे हुए मिले, कुछ इतने ढीले या इतने टाइट की पानी में गिरने के बाद वे खुद मुसीबत बन जाएं। नावों का लाइसेंस मांगने पर नाव चालक उसे नहीं दिखा पाए।
नगर निगम ने नावों का संचालन रोककर उन्हें किनारे बंधवा दिया। मंगलवार को नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी इन नावों पर कार्रवाई के लिए बोट क्लब पहुंचे, लेकिन वहां जाकर लाइसेंस के नवीनीकरण में जुट गए। शाम तक 61 निजी नाव संचालकों ने अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण करा लिया था। जिससे नगर निगम को करीब नौ लाख रुपए का राजस्व मिल गया।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अबसे बिना लाइसेंस और सुरक्षा उपकरणों को नाव संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर दस्तावेज अथवा सुरक्षा प्रोटोकाल की अनदेखी मिलती है तो ऐसी नाव को जब्त कर लिया जाएगा।
यह भी पढ़ें- MP में आटे की लोई में छिपाया विस्फोटक खाने से 11 गायों-बछड़ों के उड़े जबड़े, 3 की दर्दनाक मौत
सैलानियों के लिए बड़ा आकर्षण बड़े तालाब में नौकायन भोपाल के पर्यटन उद्योग का प्रमुख इंजन है। बोट क्लब पर हर रोज औसतन 2500 से 3000 लोग पहुंचते हैं। इनमें से कम से कम 1500 से 2000 लोग पैडलबोट, शिकारा अथवा डोंगी की सवारी जरूर करते हैं। अनुमान है कि यह 15 से 20 करोड़ सालाना का कारोबार है। इस व्यवस्था की निगरानी और प्रबंधन पर्यटन विकास निगम और भोपाल नगर निगम के पास है।
बड़े तालाब में बिना लाइसेंस के चल रहीं नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जा रहा है। लाइफ जैकेट सहित अन्य सुरक्षा नियमों को लेकर जांच की गई है। बिना लाइसेंस और सुरक्षा मानकों को पूरा किए नावों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। - तन्यम वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त