
भोपाल। व्यापमं मामलों की विशेष अदालत ने मुन्ना भाई एमबीबीएस की तर्ज पर आरक्षक भर्ती परीक्षा 2016 के मूल अभ्यर्थी और उसके स्थान पर परीक्षा में सम्मिलित हुए फर्जी परीक्षार्थी को 7 साल कैद और 12 हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश एससी उपाध्याय ने सुनाया। संभवत: व्यापमं घोटाले में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में पहली सजा का फैसला है।
अभियोजन अनुसार घटना 20 जुलाई 2016 को सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर 12 बजे के बीच विदिशा रोड स्थित सुरभि कॉलेज में हुई थी। परीक्षा के दौरान परीक्षा केन्द्र में मौजूद पर्यवेक्षकों द्वारा जब परीक्षार्थीयों के प्रवेश पत्रों और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही थी तो उन्हें एक परीक्षार्थी के दस्तावेज संदिग्ध दिखाई दिए।
पर्यवेक्षकों ने तुरंत ही उस परीक्षार्थी को दूसरे कमरे में ले जाकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह सतीश बघेल के स्थान पर परीक्षा देने आया था इसके लिए उसे दो लाख रूपए दिए जाने थे।
इस फर्जी परीक्षार्थी ने पूछताछ में बताया कि वह धौलपुर राजस्थान का रहने वाला है और उसका नाम जयवीर सिंह है। सतीश भी उसी के शहर का रहने वाला है। फर्जी परीक्षार्थी ने पूछताछ में बताया कि उसने एक दिन पहले आईएएस कॉलेज में वह रणदीप सिंह नामक मूल परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा में सम्मिलित हुआ था।
इसके बाद वह सागर, पथरिया स्थित इन्फिनिटी मैनेजमेंट एण्ड इंजीनियरिंग कॉलेज में 4 अगस्त 2016 को आयोजित होने वाली परीक्षा में भी सम्मिलित होने वाला था। परीक्षा केंद्र में मौजूद पर्यवेक्षकों ने यह जानकारी प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के केन्द्राध्यक्ष को दी जहां से सूखी सेवनिया में रिपोर्ट की गई थी।
सूखी सेवनिया पुलिस ने फर्जी परीक्षार्थी युवक जयवीर सिंह और परीक्षा केन्द्र के बाहर घूम रहे मूल परीक्षार्थी को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम, धोखाधड़ी , जालसाजी, फर्जीवाड़ा और षडयंत्र के तहत अपराध कायम किया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अनिल शुक्ला आरोपियों के खिलाफ अपराध प्रमाणित करने में सफल हुए जिस आधार पर उक्त सजा का फैसला सुनाया है।