शाहजहां की वो चिट्ठी, जिसमें छिपा है मुमताज के हुस्न का राज; दतिया में मिले मुगलकालीन 20 दुर्लभ पर्चे
दतिया में मुगलकालीन दुर्लभ पत्रों का संग्रह मिला है, जिसमें शाहजहां, अकबर और नूरजहां से जुड़े फारसी पत्र शामिल हैं। इनमें शाही संदेश और प्रेमभाव व्यक्त हैं।
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 08:56:56 AM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 08:56:56 AM (IST)
दतिया में मिले मुगलकालीन 20 दुर्लभ पर्चे। (नईदुनिया)HighLights
- शाहजहां की चार गुणा चार इंच की चिट्ठी मिली।
- पत्र में मुमताज की खूबसूरती का वर्णन किया गया।
- संग्रह में अकबर और नूरजहां के पत्र भी शामिल।
शशिकांत तिवारी, नईदुनिया, भोपाल। पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल बनवाने वाले मुगल शासक शाहजहां का फारसी में लिखा छोटे आकार का पत्र (चार गुना चार इंच) मिला है। इसमें उन्होंने लिखा था- 'मेरे महबूब के चेहरे पर जो यह सुंदर तिल है, यह उसकी खूबसूरती को बयां करने वाला दूसरा सबसे बड़ा गुण है। उसके रूप और सुंदरता का यह नजारा ऐसा है, मानो कोई कुशल नाविक या कोई बड़ा उस्ताद इस हुस्न की कश्ती को चला रहा हो।'
माना जा रहा है कि शाहजहां ने ये पंक्तियां मुमताज के लिए लिखी होंगी। ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और सर्वेक्षण के दौरान दतिया पुरातत्व विभाग के पुराविद डा. वसीम खान को यहीं के राधावल्लभ मिश्रा के पास से ऐसे 20 पत्र मिले हैं। उन्होंने देशभर से ऐसे पुराने पर्चियों की शक्ल के पत्र और सिक्कों का संग्रहण किया है। इनमें से अधिकतर आगरा में पुरानी पुस्तकें बेचने वाली दुकानों व अन्य स्थानों से उन्हें मिले थे। इनमें अकबर और नूरजहां द्वारा लिखे गए पत्र भी शामिल हैं।
नूरजहां को भी लिखे थे कुछ पत्र
- डॉ. वसीम खान का कहना है कि शाही पत्रों को बर प्रजाति के कबूतरों के गले में बेलनाकार ताबीज में भरकर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाया जाता था। लंदन के अल्बर्ट म्यूजियम में भी इस तरह के पत्र रखे हैं। इनकी विशेष पहचान यह होती है कि शेरो-शायरी की भाषा में गोपनीय बात भी लिखी जाती थीं और सोने का डस्ट इन पत्रों में लगा रहता था। कुछ पत्र नूरजहां से संबंधित हैं, जिनमें स्वर्ण मिश्रित स्याही से मोमबत्ती का चित्रण है।
- बता दें, मुगलकाल में कबूतरों द्वारा पत्र भेजने का खूब प्रचलन था। अबुल फजल द्वारा लिखित आइन-ए-अकबरी में भी इसका उल्लेख है। मुगल काल में ही सैय्यद मोहम्मद मूसावी ने 'कबूतरनामा' पुस्तक लिखी थी।
अकबर ने क्या लिखा था पाती में
'निगारा बर सरत ताज-ए-करम बाद', यानी आपके सिर पर हमेशा कृपा, उदारता और बड़प्पन का ताज सजा रहे। 'सरत मन जेर-ए-पायत दम-ब-दम बाद' मतलब मेरा सिर हमेशा हर पल आपके कदमों (चरणों) में झुका रहे। कुल मिलाकर इस पाती में लिखने वाले ने सामने वाले के वैभव, सलामती और खुशहाली के लिए बेहद ऊंचे दर्जे के शब्दों में दुआ दी है।
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शाहजहां की चिट्ठी में गुलाब और अकबर के पत्र में रहता था चौकोर निशान
- चिट्ठियों में बने प्रतीक चिह्न के आधार पर पता चलता था कि यह किसके द्वारा लिखा गया है। शाहजहां द्वारा लिखी पर्चियों में गुलाब का फूल बना रहता था जो उनकी न्यायप्रियता का प्रतीक था। इसी तरह से अकबर की चिट्ठियों में चौकोर निशान रहता था, जिसे फारसी में 'उजुक ' नाम से जाना जाता था। डा. वसीम खान का कहना है इस तरह के प्रतीक चिह्न मुगल राजवंश के बादशाहों और उनक बेगमों की पहचान बताते थे।
- ये पर्चियां लिखी तो गई थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से भेजी नहीं जा सकीं। इसी कारण ये मुड़ी हुई नहीं हैं। हिलाने पर सोने की डस्ट साफ दिखती है। फारसी भाषा में रम्ज शैली में इन्हें लिखा गया है। यह संकेत, प्रतीक या इशारे के माध्यम से अभिव्यक्ति की शैली होती है। इन पत्रों को फारसी के पुराने विशेषज्ञों के माध्यम से बहुत मुश्किल से पढ़ा जा सका। नर्मदापुरम में बाटनी के प्राध्यापक रहे डा. वजाहत शाह, पुरातत्व संचालनालय में पदस्थ कर्मचारी इश्तियाक नूर, झांसी निवासी लतीफ और डॉ. वसीम ने कुछ पत्रों में लिखे शब्दों का भाव समझा।
वर्जन
ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत एक से एक दुर्लभ पांडुलिपियां मिली हैं, इनमें ये पत्र भी हैं। ये दतिया में एक व्यक्ति के पास संग्रहित हैं। कबूतरों के माध्यम से भेजे जाने वाले पत्र बहुत दुर्लभ हैं। मदन कुमार नागरगोजे, आयुक्त, पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार
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