
नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदा भोपाल गैस त्रासदी (यूनियन कार्बाइड) को 42 साल का लंबा समय बीत गया है लेकिन अब भी हालात सुधर नहीं सके हैं। कारखाने से एक जनवरी 2025 को 337 मीट्रिक टन जहरीला रासायनिक कचरा धार जिले के पीथमपुर स्थित प्लांट में भेजे जाने के बाद दावा किया जा रहा था कि जहर खत्म हो चुका है, लेकिन ऐसा नहीं है।अब भी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास की 19 समुदायों के पेयजल में 70 प्रतिशत मल के बैक्टीरिया (फीकल कोलीफार्म) होने की पुष्टि हुई है।
यह दावा गैस पीड़ितों के लिए हक की लड़ाई लड़ने वाले चार संगठनों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को इन इलाकों में आपूर्ति हो रहे पेयजल की जांच रिपोर्ट पेश करते हुए किया है।
साथ ही उन्होंने आरोप लगाए हैं कि नगर निगम भोपाल मोहल्लों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति कर इंदौर के पीथमपुर जैसी स्थिति पैदा करने का इंतजार कर रहा है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने बताया कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के 30 समुदायों के नलों से 63 पानी के नमूने लिए, जिनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफार्म की पुष्टि हुई। यह स्पष्ट प्रमाण है कि 30 में से 19 समुदायों को दिया जा रहा पेयजल मल से दूषित है।
अपर लेक (बड़ा तालाब) से आपूर्ति किए गए पानी के 90 प्रतिशत नमूने और कोलार डैम से आपूर्ति किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए हैं।
इस वजह से इन समुदायों के निवासी मल-दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारियों और तकलीफों की चपेट में हैं। पूरे-पूरे परिवार दस्त और उल्टी की शिकायत कर रहे हैं, और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के बहुत अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
जिन 19 समुदाय का पेयजल दूषित निकला है, उनमें अन्नू नगर, अटल अयूब नगर, ब्लूमून कालोनी, चंदन नगर, चांदबाड़ी, गरीब नगर, जेपी नगर, कल्याण नगर, नवाब कालोनी, न्यू आरिफ नगर, प्रीत नगर, प्रेम नगर, शंकर नगर, शिवनगर फेस तीन, शिवशक्ति नगर, शिवनगर फेस एक गुप्ता नगर, शिवनगर फेस तीन, सुंदर नगर और उड़ीया बस्ती शामिल हैं। 11 समुदायों का पेयजल निकला स्वच्छ जांच रिपोर्ट में पेयजल के जो 20 नमूने स्वच्छ पाए गए हैं, वह 11 समुदाय के हैं। जिनमें द्वारका नगर, अहले हदीश, कैंची छोला, कैंची छोला न्यू ब्लाक, कृष्णा नगर, न्यू कबाड़खाना, निशातपुरा बृजविहार कालोनी, फूटा मकबरा,राजघर, शाहीन कालोनी व शक्ति नगर शामिल हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर निवासियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले अधिकारियों को दंडित करने के लिए, भागीरथपुरा की तरह लोगों की जान जाने का इंतज़ार नहीं किया जाना चाहिए। हम मांग करते हैं कि इस क्षेत्र में सीवेज और ड्रेनेज की योजना का समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए और पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था तुरंत स्थापित की जाए।
रचना ढिंगरा, अध्यक्ष,भोपाल ग्रुप फार इंफार्मेशन एंड एक्शन
अगस्त 2018 में पाइपलाइन के पानी में मल-संदूषण की शिकायतों के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को इस क्षेत्र में सीवेज लाइनें बिछाने और उचित जल-निकासी (ड्रेनेज) सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।बीएमसी ने तीन महीने में यह काम पूरा करने का वादा किया था, लेकिन पिछले आठ वर्षों में इस दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया गया है।
बालकृष्ण नामदेव, अध्यक्ष, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा
2004 में सुप्रीम कोर्ट ने ये माना की यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की वजह से यहां के रहवासियों का पानी जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित है।इन्हीं जहरीले तत्वों से बचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने और पीने का साफ़ पानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।
रशीदा बी, अध्यक्ष ,भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ
गैस पीड़ित संगठनों द्वारा जो पेयजल के नमूनों की रिपोर्ट पेश कर फीकल कोलीफार्म पानी में होने का दावा किया गया है। यह मल के बैक्टीरिया होते हैं और पेयजल व सीवेज की लाइनों में लीकेज होने से इस तरह के हालात बनते हैं। इसे जिम्मेदार एजेंसी को आपूर्ति बंद करवाकर जल्द से जल्द सुधार करवाना चाहिए। यदि समय रहते सुधार नहीं करवाया गया तो मल के बैक्टीरिया युक्त पेयजल की वजह से भागीरथपुरा में जो हालात बने थे, वह इन इलाकों में बन सकते हैं।
कुलदीप गुप्ता, लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ एम्स भोपाल