भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय(एमसीयू) एवं एआइसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग अकादमी के सहयोग से 'सिनेमैटिक कम्युनिकेशन' पर केंद्रित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन हुआ। समापन सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में भोर फिल्म से चर्चित फिल्म निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी और समाज उत्प्रेरक फिल्में तभी बन सकती हैं, जब आप वह दिखाएं जो आप खुद दिखाना चाहते हैं, न कि वह, जो आपसे बनवाया जा रहा है, समसामयिक मुद्दों को स्क्रीन पर उतार कर भी प्रभावी फिल्में बनाई जा सकती हैं। श्री सिंह ने कहा कि आज सिनेमा में फॉर्मूले बनाना और तोड़ना भी क्रिएटिविटी है। सिनेमा की कहानी में पृष्ठभूमि की वास्तविकता दिखाना और कहानी के लिए सही चरित्र गढ़ना काफी चुनौतीपूर्ण है। एफडीपी प्रोग्राम में विशेष अतिथि के रूप में एआईसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक सीएस वर्मा ने कहा कि इस तरह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम से शैक्षिक संस्थाओं में अकादमिक गुणवत्ता बढ़ती है, जिसका फायदा समाज को मिलता है। विश्वविद्यालय द्वारा 'सिनैमैटिक कम्युनिकेशन' पर आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में देशभर के लगभग 200 मीडिया और जनसंचार के शिक्षकों ने भाग लिया। विश्वविद्यालय में एआईसीटीई के को-ऑर्डीनेटर प्रो. सीपी. अग्रवाल, समन्वय एवं प्रो. पवित्र श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित इस सफल कार्यक्रम के समापन पर सहायक प्राध्यापक डॉ. गजेंद्र अवासिया ने सभी प्रतिभागियों, आमंत्रित विशेषज्ञों एवं व्यवस्था में लगे लोगों का आभार व्यक्त किया।

सिनेमा के माध्मय से अछूती और महत्वपूर्ण सूचनाएं लोगों के बीच पहुंचाएं

समापन सत्र में कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि सिनेमा आज भी एक लोकप्रिय और प्रभावी जनमाध्यम है, जो अब डिजीटल तकनीक से और भी सशक्त हो रहा है, लेकिन अभी भी हमारी समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के कई अनछुए पहलुओं को जनता तक पहुंचाने में सिनेमा की भूमिका का इंतजार है, फिल्मकारों के लिए इसमें काफी संभावनाएं हैं। अंतिम पहले सत्र को मैनिट में सहायक प्राध्यापक और डॉ. मीना अग्रवाल ने ऊर्जा सशक्तिकरण विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि आयुर्वेद योग, एवं भारतीय अध्यात्म में मनुष्य के अंदर विद्यमान सात अदृश्य चक्रों का बड़ा महत्व है, जिनकी सक्रियता से हम अपनी सृजनात्मक शक्ति को बढ़ा सकते हैं। आंतरिक शक्ति के माध्यम से हम किसी भी महामारी पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

Posted By: Lalit Katariya

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