भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। शहर के भीतर जिन खेतों में आग लगी थी, वे खेत मालिक किसान सामने आ गए हैं। इन्होंने पुलिस को एक आवेदन देकर कहा है कि खेत की नरवाई में आग उन्होंने नहीं लगाई थी, बल्कि शार्ट सर्किट की वजह से लगी थी। इन खेतों से सटे ईकोलाजिकल पार्क में लगी आग को लेकर भोपाल सामान्य वन मंडल और जिला प्रशासन सख्त है। वन विभाग ने बागसेवनिया पुलिस के बाद कटारा हिल्स पुलिस को भी आवेदन दे दिया है, जिसमें खेतों में आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके बाद किसान सामने आए हैं। वन विभाग ने जांच में पाया है कि खेतों की नरवाई जलाने के लिए लगाई आग के कारण ही इकोलाजिकल पार्क में आग लगी है।
बता दें कि आग लगने की घटना बीते सोमवार को हुई थी। जांच में 35 हेक्टेयर वन क्षेत्र के प्रभावित होने की पुष्टि हुई थी। हर्रा, बेहड़ा, जामुन, बगरद, नीम जैसी प्रजाति के सैंकड़ों पेड़ झुलस गए थे। पानी डालने के लिए रखे पाइप भी जले थे। क्षेत्र के बरखेड़ा पठानी, एम्स, पिपलिया पेंदे खां, लहारपुर, अवधपुरी के बीच खेतों में बीते सोमवार के पहले एक हफ्ते तक आग लगाई जाती रही थी, जिसकी वजह से क्षेत्र में धुएं का स्तर बढ़ गया था। पर्टिकुलेट मैटर पीएम 10 व 2.5 का स्तर तीन गुना तक बढ़ गया था। आसपास की कालोनियों में रहने वाले लोगों को परेशान होना पड़ा था। खेतों में लगे 75 पेड़ों को 50 प्रतिशत नुकसान पहुंचा था।
वन विभाग के अधिकारी किसानों पर कार्रवाई के लिए आवेदन लेकर आए थे, जिसमें कुछ कमियां थी, उसे पूरा करने के लिए कहा गया। जैसे ही आवेदन मिलेगा, उस पर गंभीरता से जांच करके कार्रवाई करेंगे। क्षेत्र में आग नहीं लगने देंगे। इससे अकेले वनों को ही नहीं, प्राकृतिक तंत्र को भी नुकसान होता है।
- सुरेश मीणा, थाना प्रभारी कटारा हिल्स
आवेदन के आधार पर सभी तथ्यों को देख रहे हैं, जांच में जो भी सामने आएगा, उस आधार पर कार्रवाई करेंगे। शहर के अंदर इस तरह आग नहीं लगाने दी जाएगी। यह गलत है।
- संजीव चौकसे, थाना प्रभारी बागसेवनिया
वन विभाग अपनी ओर से कार्रवाई के लिए पूरा प्रयास कर रहा है, ताकि दोबारा इस तरह आग न लगाई जाए। बागसेवनिया थाने के बाद कटारा हिल्स थाने के संज्ञान में भी घटना लाई है। किसानों ने बचाव में पुलिस को बताया है कि आग शार्ट सर्किट से लगी थी। जब ऐसा था तो किसानों की ओर से बुझाने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किए गए थे। हर वर्ष आग लगाई जाती रही है, जिसकी वजह से शासकीय संपत्ति को नुकसान हो रहा है। जनहानि भी हो सकती है।