
भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की है। लेकिन, कुछ इसके उलट मामले भी सामने आए हैं। मप्र के सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला ले चुके छात्रों का देश का सबसे अच्छा संस्थान एम्स में चयन होने के बाद सीट छोड़ने पर मोटी रकम चुकाना पड़ी। एक छात्र को 10 लाख व दूसरे को 45 लाख रुपए जमा करना पड़ा। प्रवेशित सीट से इस्तीफा देने और एम्स में चयन के बीच सिर्फ 16 घंटे का अंतर था। छात्रों ने सीट से त्यागपत्र देने के लिए अवधि सिर्फ एक दिन बढ़ाने की मांग की थी, पर उनकी सुनवाई नहीं हुई।
निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में दूसरे चरण में दाखिले के बाद इस्तीफा देने की आखिरी तारीख 20 अगस्त थी। उधर, सभी एम्स में दाखिले के लिए ओपन राउंड काउंसलिंग 21-22 अगस्त को थी। कई उम्मीदवारों के अंक अच्छे थे। उन्हें उम्मीद थी कि किसी एम्स में उनका चयन हो सकता है, लेकिन जोखिम नहीं उठाते हुए उन्होंने मप्र के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला ले लिया। 21 अगस्त को इनमें दो छात्रों को चयन एम्स के लिए हुआ। विदिशा मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाली एक छात्रा का चयन एम्स नागपुर में व चिरायु मेडिकल कॉलेज में दाखिल एक छात्र का चयन एम्स पटना के लिए हो गया।
इन छात्रों ने 20 अगस्त के बाद मध्यप्रदेश में प्रवेशित सीट से इस्तीफा दे दिया है। लिहाजा तय नियमों के तहत सरकारी कॉलेज में दाखिला लेने वाले से सीट लीविंग बांड के तौर पर 10 लाख रुपए व निजी कॉलेज में प्रवेश लेने वाले से पूरे कोर्स की फीस (करीब 45 लाख) रुपए लिए गए हैं। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अफसरों ने कहा कि प्रवेश नियमों में पहले से ही साफ कर दिया गया है सीट छोड़ने पर सीट लीविंग बांड के तहत राशि जमा करना होगी। 31 अगस्त तक काउंसलिंग पूरा करने के निर्देश हैें। इस बीच मॉपअप राउंड व कॉलेज स्तर की काउसलिंग भी कराना है। ऐसे में समय बढ़ाना बहुत मुश्किल होता है।