
नवदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। सरकारी स्कूलों में बारिश सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा की परीक्षा बन गई है। जिले में कहीं दीवारों में चौड़ी दरारें हैं, कहीं छज्जे टूटकर गिरने की स्थिति में हैं, कहीं बारिश का पानी भवन की नींव कमजोर कर रहा है तो कहीं जर्जर भवन तोड़ देने के बाद बच्चे रसोईघर में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की फाइलों में मरम्मत के प्रस्ताव जरूर हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर यह है कि 555 स्कूल आज भी मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं।
हाल ही में सिरोंज के गोपाल नगर माध्यमिक विद्यालय में छत का प्लास्टर गिरने से छात्रा घायल होने की घटना के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर बच्चों को सुरक्षित स्कूल कब मिलेंगे। हालांकि विभागीय अधिकारी मरम्मत का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजने की बात कह रहे है लेकिन राशि कब आएगी और मरम्मत कब होगी। इसका जवाब उनके पास भी नहीं है।
दो साल पहले भी सामने आई थी यही तस्वीरजिले में दो वर्ष पहले कराए गए सर्वे में 1195 स्कूल भवन जर्जर पाए गए थे। इनमें से सबसे खराब स्थिति वाले स्कूलों के लिए मरम्मत का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन केवल 95 स्कूलों के लिए राशि स्वीकृत हुई। उसमें भी अब तक 73 स्कूलों को आंशिक राशि ही मिल सकी है। बाकी भवन आज भी मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं।
इस वर्ष भी जिला शिक्षा केंद्र ने 555 स्कूलों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा है। इनमें छत, दीवार, फर्श, प्लास्टर, छज्जे और अन्य आवश्यक सुधार कार्य शामिल हैं। हालांकि अब तक राशि स्वीकृत नहीं हुई है, जिससे बरसात के बीच कोई काम शुरू नहीं हो पाया।
हर साल बारिश के दौरान स्कूल भवनों से जुड़े हादसे सामने आते हैं। इसके बावजूद मरम्मत की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि कई स्कूल पूरे सत्र तक जर्जर हालत में ही संचालित होते रहते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत का बजट बारिश शुरू होने से पहले उपलब्ध होना चाहिए, ताकि जोखिम वाले भवनों को समय रहते सुरक्षित बनाया जा सके। फिलहाल जिले के सैकड़ों स्कूलों में बच्चे हर दिन इसी उम्मीद के साथ कक्षा में बैठ रहे हैं कि अगली बारिश उनके स्कूल की कमजोर छत और दीवारों की अग्निपरीक्षा न बन जाए।
2029 स्कूल भवन है जिले में
208 भवनों में संचालित होते है हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल
555 स्कूलों की मरम्मत का प्रस्ताव लंबित
1195 स्कूल दो वर्ष पहले जर्जर मिले थे
95 स्कूलों को ही मरम्मत की स्वीकृति मिली
73 स्कूलों को आंशिक राशि जारी हुई
1.5 लाख रुपये हिरनई की स्कूल प्रभारी अपने स्तर पर खर्च कर चुकी हैं
विदिशा विकासखंड के एकीकृत माध्यमिक शाला मूंगोद में 111 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। स्कूल भवन की दीवारों में कई जगह गहरी दरारें दिखाई देती हैं। बारिश के दौरान इन दरारों को देखकर अभिभावकों की चिंता बढ़ जाती है, लेकिन बच्चों के पास पढ़ने के लिए दूसरा भवन नहीं है। स्कूल प्रभारी मुकेश चौहान बताते हैं कि कई बार मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन राशि नहीं मिली। मजबूरी में बच्चों को उसी भवन में पढ़ाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जो शाला ग्रांट मिलती है, वह भी इतनी कम होती है कि उससे सिर्फ छोटे-मोटे काम ही हो सकते हैं। पिछले साल अंतिम किश्त मार्च के अंत में आई और कुछ ही समय बाद राशि समायोजित हो गई।
स्कूल भवन का पिछला हिस्सा जर्जर हो गया है। प्राथमिक शाला हिरनई की सबसे बड़ी समस्या भवन के चारों ओर भरने वाला पानी है। हर बारिश में करीब चार महीने तक स्कूल परिसर जलभराव से घिरा रहता है। लगातार नमी के कारण दीवारें कमजोर हो रही हैं और छज्जा भी जर्जर हो चुका है। स्कूल प्रभारी अर्चना त्रिपाठी बताती हैं कि मरम्मत के लिए मिलने वाली ग्रांट बेहद कम होती है। कई जरूरी काम उन्होंने अपने स्तर पर कराए हैं और पिछले चार वर्षों में करीब डेढ़ लाख रुपये स्वयं खर्च किए हैं। फिलहाल बच्चों को केवल सुरक्षित कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
खरी के स्कूल भवन की दीवार जर्जर हो गई है। माध्यमिक शाला खरी में भवन की छत में दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। स्कूल प्रभारी एस.एस. ठाकुर कहते हैं कि हर साल मरम्मत की जरूरत बताई जाती है, लेकिन बजट समय पर नहीं मिलता। ग्रांट की राशि भी किश्तों में आती है, जिससे कोई बड़ा काम नहीं हो पाता। बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की रहती है कि कहीं कोई हिस्सा अचानक टूटकर न गिर जाए।
लालाखेड़ी का स्कूल मध्यान्ह भोजन के लिए बने किचन शेड में लग रहा है। ग्राम लालाखेड़ी में जर्जर भवन को तो सुरक्षा कारणों से तोड़ दिया गया, लेकिन नया भवन अब तक नहीं बन सका। ऐसे में बच्चों की कक्षाएं मिड-डे मील के किचन में संचालित की जा रही हैं। विडंबना यह है कि बारिश के दौरान वहां भी पानी पहुंच जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नए भवन की मांग की गई, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ।
जिले के 555 स्कूलों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। राशि मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू कराए जाएंगे। आरपी लखेर, डीपीसी, विदिशा।