Subhash Chandra Bose Jayanti:भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत को आजादी दिलाने में पूर्ण योगदान दिया है। उनकी मौत 1945 के विमान हादसे में बताई जाती है, लेकिन इस पर भी काफी सवाल खड़े हुए हैं। क्या वाकई नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में हुई थी? आखिर क्यों उनकी मौत एक रहस्य बन गई? ये सवाल सदियों से हमारे इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। इसी पर आधारित है नई वेब सीरीज 'इन सर्च आफ द लास्ट प्राइम मिनिस्टर'। राजधानी के ख्यात रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता संजय मेहता इसमें नेताजी के किरदार में नजर आएंगे।

भोपाल के प्रख्यात पांडेय द्वारा निर्देशित और लिखित 'इन सर्च आफ द लास्ट प्राइम मिनिस्टर' वेब सीरीज नेताजी के जीवन व वास्तविक घटनाओं और मृत्यु के बाद के महत्वपूर्ण हिस्सों को दर्शाती है। प्रख्यात पांडेय ने सोमवार को इस सीरीज को प्रमोट किया। उन्होंने बताया कि इसमें यही बताया गया है कि क्या सच में नेताजी की मृत्यु 1945 में विमान दुर्घटना में हुई थी? या यह सब एक साजिश थी, क्यों कई खोजबीन में सामने आया है कि तब कोई विमान हादसा हुआ ही नहीं था। वेब सीरीज लोगों को इस तथ्य से अवगत कराएगी कि स्वतंत्रता में योगदान देने के लिए नेताजी और आजाद हिंद फौज ने कितना त्याग और संघर्ष किया। नेताजी की मौत के रहस्य को सुलझाने के लिए तीन कमीशनों का गठन किया गया था, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण खोसला कमीशन था, जिसके अध्यक्ष जीडी खोसला थे। इसमें खोसला कमीशन के साथ सुरेश बोस के मुद्दों को खासकर दिखाया गया है। आज की पीढ़ी के लिए असली नायक के महत्व और भारत की आजादी के पीछे के कारण को समझना बहुत जरूरी है। इतिहास में ऐसे कई अनसुलझे प्रश्न हैं जिनका आज उत्तर दिया जाना आवश्यक है जैसे नेताजी के साथ वास्तव में क्या हुआ था और उनकी मृत्यु एक रहस्य में कैसे बदल गई? निर्देशक प्रख्यात पाण्डेय के अनुसार, इस सीरीज का मुख्य उद्देश्य केवल सुभाष चंद्र बोस, उनकी 'रहस्यमय मृत्यु' और वास्तविक जीवन की घटनाओं पर है। इस सीरीज में एक्टर अनूप जोशी, प्रतीक दीवान मुख्य कलाकार हैं।

गुमनामी बाबा ही थे सुभाषचंद्र बोस: 'इन सर्च आफ द लास्ट प्राइम मिनिस्टर' एक पीरियाडिक ड्रामा है जिसमें 1940 और 70 के दशक के युग को देखा जा सकता है। इस फिल्म में कई महत्वपूर्ण दृश्य हैं, जिसमें किसी भी दृश्य में लोकेशन को रिपीट नहीं किया गया है। इस सीरीज में प्रत्येक बीस मिनट के छह एपिसोड हैं, जिसे ओटीटी प्लेटफार्म हंगामा प्ले, एयरटेल एक्सस्ट्रीम और वीआइ मूवीज एंड टीवी पर देखा जा सकता है। प्रख्यात ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को बनाने से पूर्व उन्होंने तीन साल रिसर्च की है। अनुज धर की इंडियन बिगिस्ट कवरअप और चंद्रचूर घोष की किताब गुमनामी से महत्वपूर्ण तथ्य लेकर बेवसीरीज के माध्यम से बताया गया है कि रसिया और चाइना में रहने के बाद नेताजी नेपाल के रास्ते भारत आए थे और राष्ट्रहित में अपनी पहचान उजागर न करते हुए वे गुमनामी बाबा के नाम से रहे। वियतनाम युद्ध में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका नभाई थी। 1985 में 88 वर्ष की आयु में उनकी मौत हुई थी। मौत के बाद गुमनामी बाबा के पास से जो सामान बरामद हुआ था, वह सुभाषचंद्र बोस का ही था।

Posted By: Lalit Katariya

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