
Swachh Survekshan 2023 Ranking: नवदुनिया राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के 13 नगरीय निकायों में जहां सौ प्रतिशत कचरा स्रोत पर ही अलग-अलग किया जा रहा, वहीं कुछ कस्बे और शहर ऐसे हैं जहां पांच प्रतिशत भी कचरा अलग-अलग नहीं किया जा रहा है। धार्मिक व पर्यटन स्थल अमरकंटक में तो यह शून्य है। सीधी जिले के चुरहट में मात्र एक प्रतिशत जबकि जिला मुख्यालय होने के बाद भी छतरपुर में दो प्रतिशत कचरा ही अलग-अलग किया जा रहा है।
यही कारण है कि गारबेज फ्री सिटी (जीएफसी) के लिए मिलने वाली स्टार रेटिंग में मध्य प्रदेश के 158 नगरीय निकायों को ही स्टार रेटिंग मिली हुई है। कचरा अलग-अलग करने के साथ ही इसकी प्रोसेसिंग करने में भी कई नगरीय निकाय पिछड़े हैं, इस कारण भी स्टार रेटिंग कम हुई है। बता दें कि स्टार रेटिंग में पिछड़ने के कारण ही स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में मध्य प्रदेश पहले पहले से दूसरे पायदान में पहुंच गया है।
इसके अलावा शहर के गंदे पानी को निर्धारित मापदंड के अनुसार रिसाइकल कर उपयोग के लिए मिलने वाला ‘वाटर प्लस’ प्रमाण पत्र भी प्रदेश के सात शहरों को ही मिला हुआ है। इसी तरह से डोर-टू-डोर (डीटूडी) संग्रहण के मामले भी कई नगरीय निकायों का काम ठीक नहीं है। इस कारण स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदेश दूसरे पायदान पर पहुंच गया।
पचमढ़ी कैंट और आंकारेश्वर में डीटूडी मात्र 55 प्रतिशत ही है। सांची में 71, निवाड़ी में 76, नीमच में 85, बड़वानी में 87, मुरैना में 89, रायसेन में 91, नरसिंहपुर में 92, नर्मदापुरम में 94 प्रतिशत है। डोर टू डोर कचरा संग्रहण और इसे अलग-अलग करने के मामले में बुरी स्थित धार्मिक और पर्यटन शहरों की है।

अंतिम रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि हम कहां पिछड़े हैं। उसी आधार पर तैयारी करेंगे, जिससे अगले वर्ष फिर मध्य प्रदेश पहले नंबर पर आ सके। हमारी जो कमियां रह गई हैं उन्हें दूर करेंगे। - भरत यादव, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास