• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • AI बूटकैंप
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

एमपी में जमीन की फ्री रजिस्ट्री के लिए लगेंगे 3 शिविर, एक माह में पूरा होगा काम, जानें पंजीयन की प्रक्रिया

मध्य प्रदेश में गुरुवार से ग्रामीण आबादी की परिसंपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री कराने के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना प...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 09:15:23 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 09:15:23 PM (IST)
एमपी में जमीन की फ्री रजिस्ट्री के लिए लगेंगे 3 शिविर, एक माह में पूरा होगा काम, जानें पंजीयन की प्रक्रिया
एमपी में जमीन की फ्री रजिस्ट्री के लिए लगेंगे 3 शिविर

HighLights

  1. 50 लाख से अधिक ग्रामीण परिसंपत्तियों की होगी निश्शुल्क रजिस्ट्री
  2. 3,800 करोड़ रुपये का पंजीयन शुल्क राज्य सरकार ने किया माफ
  3. 17 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच तीन चरणों में लगेंगे शिविर

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में गुरुवार से ग्रामीण आबादी की परिसंपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री कराने के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना प्रारंभ हो गई। रजिस्ट्री की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी करने के लिए पटवारी को निष्पादन अधिकारी बनाया गया है। पंचायत स्तर पर तीन बार विशेष शिविर एक माह के भीतर लगाए जाएंगे। आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी अनिवार्य होगी।

3,800 करोड़ रुपये का शुल्क माफ, 3 चरणों में आयोजित होंगे विशेष शिविर

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि का ड्रोन से सर्वे कराया जा चुका है। अधिकार पत्र दिए गए हैं, लेकिन अब रजिस्ट्री कराई जा रही है। इसमें लगभग 3,800 करोड़ रुपये का शुल्क सरकार को प्राप्त होता, लेकिन इसे सरकार ने कानून में संशोधन करके माफ कर दिया।


अब घर-दुकान की रजिस्ट्री के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। ऐसी परिसंपत्तियां 50 लाख से अधिक हैं। रजिस्ट्री की प्रक्रिया ग्राम एवं पंचायत स्तर पर तीन चरणों में होगी। इसके लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। पहला शिविर 17 से 19 सितंबर, दूसरा 24 से 26 और तीसरा एक से तीन अक्टूबर तक होगा।

एक माह में निश्शुल्क रजिस्ट्री करने का लक्ष्य

आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। मोबाइल ऐप के माध्यम से निष्पादन और संपदा ऐप पर रजिस्ट्री के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए पटवारी को निष्पादन अधिकारी तथा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी को रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। रजिस्ट्री व्हाट्सएप से उपलब्ध कराई जाएगी। एक माह में निश्शुल्क रजिस्ट्री करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय करेंगे निगरानी: प्रतिदिन तैयार होगी रिपोर्ट

योजना की प्रगति की निगरानी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा की जाएगी। राजस्व विभाग प्रतिदिन होने वाली रजिस्ट्री की रिपोर्ट तैयार करेगा। यदि कहीं कोई समस्या आ रही है, जिसके कारण गति धीमी है तो उसे चिन्हित करके समाधान कराया जाएगा।

विवाद की स्थिति में सरकार लेगी जिम्मेदारी: पटवारियों पर नहीं आएगी आंच

उधर, योजना को लेकर पटवारियों की आशंका है कि विवाद की स्थिति में उनके ऊपर जिम्मेदारी आ सकती है क्योंकि उन्हें निष्पादन अधिकारी बनाया गया है। इसे लेकर वे ज्ञापन भी दे चुके हैं। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान जब यह विषय राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने उठाया था तब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा था कि सरकार रजिस्ट्री करा रही है, किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

राजस्व मंत्री ने भी कहा कि यह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है और किसी पटवारी को डरने या चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर भविष्य में जमीन या संपत्ति को लेकर कोई विवाद होता है तो उसे सुलझाने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। सरकार का उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक देना है, ताकि उनके पास अपनी संपत्ति का मजबूत कानूनी प्रमाण हो और वे भविष्य में इसका उपयोग आवश्यकता के अनुसार कर सकें।

यह भी पढ़ें- 33 लाख दीपों से जगमगाई महाकाल की नगरी अवंतिका, मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’