
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ में गुम होने वाले या अनाथ बच्चों की व्यवस्था में किसी बाहरी संस्था को सहभागी न बनाने का प्रस्ताव विश्वमांगल्य स्वनाथ परिषद की अखिल भारतीय कार्यशाला में पारित किया गया। इसमें सिंहस्थ क्षेत्र में विदेशी स्वयंसेवी संस्थाओं व विदेशी कंपनियों को काम करने की अनुमति न देने प्रस्ताव भी रखा गया है। परिषद ने इस काम के लिए स्वयं आवश्यक प्रयास करने की बात कही।
दो से चार अक्टूबर तक उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य भवन में हुई तीन दिवसीय कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रांतों से आए कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यशाला में ‘हर बच्चे को मां’ अभियान को केंद्र में रखते हुए बच्चों को परिवार जैसा वातावरण और सम्मानपूर्ण जीवन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। ‘फोस्टर केयरिंग’ सत्र में दत्तक प्रक्रिया, विभिन्न योजनाओं और मिशन वात्सल्य की जानकारी दी गई।
कार्यकर्ताओं ने सेवाधाम आश्रम का भ्रमण कर वहां चल रहे सेवा कार्यों की जानकारी भी ली। कार्यशाला में स्वनाथ सहायता केंद्र, रोजगार केंद्र, उद्योग सेवा केंद्र, स्वास्थ्य सहायता केंद्र, अनुसंधान केंद्र और इंटर्नशिप शुरू करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। परिषद देशभर में अनाथ (स्वनाथ) बच्चों के कल्याण एवं विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, व्यावसायिक और सैन्य प्रशिक्षण आदि के लिए प्रयास करती है। बैठक में परिषद के मार्गदर्शक प्रशांत हरतालकर, अखिल भारतीय संयोजिका अंजली देव, अखिल भारतीय निदेशक नीरज चौधरकर उपस्थित हुए।