
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रेलवे अस्पताल में लंबे समय से अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा असर यहां आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। इलाज की बुनियादी सुविधाएं होते हुए भी उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। कई जरूरी सेवाएं अधूरी व्यवस्था, स्टाफ की कमी और तकनीकी खामियों के कारण प्रभावित हैं।
मरीजों को समय पर जांच, दवा और उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुधार के प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं, वहीं चल रहे निर्माण कार्यों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इन समस्याओं के चलते मरीजों को बार-बार भटकना पड़ रहा है और उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सोनोग्राफी मशीन का उपयोग नहीं
अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। महंगी मशीन लंबे समय से बंद पड़ी है। मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च बढ़ रहा है। संसाधन होते हुए भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दवाइयों की कमी से इलाज प्रभावित
अस्पताल में एलपी से संबंधित आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति पूरी नहीं हो पा रही है। इसके कारण मरीजों का इलाज समय पर नहीं हो रहा और उन्हें बाजार से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई बार जरूरी दवाइयां उपलब्ध न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन इसके समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वहीं अस्पताल में रेफरल प्रक्रिया मरीजों के लिए बड़ी समस्या भी बनी हुई है।
रेनोवेशन के बाद भी ओटी शुरू नहीं
अस्पताल में लंबे समय से चल रहे रेनोवेशन के कारण कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हैं। रेलवे बोर्ड के स्पेशल पैकेज के तहत सुधार कार्य हो रहा है, लेकिन सुविधाएं समय पर शुरू नहीं हो पा रही हैं। 10 बेड का नया आईसीयू आठ महीने पहले तैयार हो चुका है, फिर भी ऑक्सीजन पाइपलाइन नहीं होने से शुरू नहीं हुआ। दूसरी ओर पुराने आईसीयू में सिर्फ 4 बेड हैं, जिससे गंभीर मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।
ये हैं प्रमुख समस्याएं
अधिकारियों का क्या कहना
हर्षित श्रीवास्तव, सीपीआरओ, जबलपुर मंडल का कहना है कि उपलब्ध सभी चिकित्सा सेवाएं मरीजों को नियमित रूप से प्रदान की जा रही हैं। किसी भी अतिरिक्त जरूरत या विशेष इलाज के लिए मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजने के लिए रेफरल की सुविधा भी उपलब्ध है। साथ ही, अस्पताल में खराब या बंद पड़ी मशीनों को शीघ्र ठीक कराने के लिए लगातार काम किया जा रहा है, ताकि सेवाएं बेहतर हो सकें।
यह भी पढ़ें- MP के कॉलेजों में 5 मई से शुरू होंगे एडमिशन, जानें काउंसलिंग का पूरा शेड्यूल