_20261014_194210_m.webp)
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश की केंद्रीय और जिला जेलों में बंद सजा प्राप्त कैदियों में 81 प्रतिशत ऐसे हैं, जो पहली बार अपराध करने के बाद जेल पहुंचे हैं। अब जेल मुख्यालय ने पहली बार अपराध करने वाले कैदियों के लिए अलग व्यवस्था बनाने, उनकी काउंसिलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ पैरोल के लिए अलग मापदंड तय करने का प्रस्ताव बनाया है। जेल महानिदेशक वरुण कपूर ने कहा कि यह प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
बता दें, यह प्रस्ताव उस अध्ययन के बाद बनाया गया है जिसमें पता चला है कि 19 प्रतिशत कैदी ऐसे हैं, जो एक से अधिक बार अपराध कर जेल पहुंचे हैं। शेष 81 प्रतिशत पहली बार अपराध वाले हैं। प्रदेश की जेलों में सजा काट रहे करीब 19 हजार कैदियों के रिकॉर्ड के पहली बार करवाए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। जेल मुख्यालय का मानना है कि पहली बार अपराध करने वाले और बार-बार अपराध करने वाले कैदियों को एक ही तरह की व्यवस्था में रखना उचित नहीं होता।
बता दें, प्रदेश की जेलों में 45 हजार कैदी बंद हैं, जिनमें 19 हजार सजा प्राप्त और बाकी विचाराधीन हैं। पहली बार अपराध करने के बाद सजा काट रहे कैदियों के लिए अलग से काउंसिलिंग की व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है। उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है, ताकि जेल में रहने के दौरान उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने और रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके।
सजा के साथ सामुदायिक सेवा का विकल्प प्रस्ताव में पहली बार अपराध करने वाले कैदियों के लिए सजा से संबंधित प्रविधानों को अलग रखने का सुझाव भी दिया गया है।
इसके अंतर्गत ऐसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, जिनमें पूरी सजा जेल में बिताने के बजाय सजा अवधि का कुछ हिस्सा सामुदायिक सेवा के रूप में पूरा करने की व्यवस्था हो। हालांकि, यह व्यवस्था किन अपराधों में और किन शर्तों पर लागू की जा सकती है, इस पर निर्णय शासन स्तर पर होगा।