MP में स्वैच्छिक तबादलों से शिक्षकों का मोहभंग; 35 हजार से घटकर सिर्फ 11,500 आवेदन आए, 28 से 30 जून के बीच जारी होंगे ट्रांसफर आदेश
इस वर्ष आवेदन संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही है, शिक्षकों ने स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए पिछले साल 35 हजार आवेदन किए थे।
Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 09:27:17 AM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 09:31:15 AM (IST)
प्रतीकात्मक फोटों, एआई से तैयार की गई है।HighLights
- प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों में से केवल 11,500 ने स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन किया
- ई-अटेंडेंस और पोर्टल की तकनीकी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन से वंचित रहे
- कानूनी विवादों को देखते हुए हाईकोर्ट में पहले ही कैवियट भी दायर कर दी गई है
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त हुई। प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों में से करीब साढ़े 11 हजार शिक्षकों ने स्वैच्छिक तबादले के लिए आवेदन किया है।
सबसे अधिक आवेदन भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों के लिए प्राप्त हुए हैं। इस वर्ष आवेदन संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही है, जिसे नई स्थानांतरण नीति और पात्रता संबंधी कड़े प्रावधानों के कारण इस वर्ष आवेदन कम हुए हैं। पिछले साल 35 हजार आवेदन हुए थे।
विभाग अब प्रशासनिक और स्वैच्छिक स्थानांतरण के आदेश जारी करने की तैयारी में है। स्वैच्छिक स्थानांतरण के आदेश 28 से 30 जून के बीच जारी कर दिए जाएंगे।
नई नीति से अधिकांश शिक्षक पात्रता से बाहर
शिक्षकों का कहना है कि इस बार लागू की गई स्थानांतरण नीति में स्वैच्छिक तबादलों के लिए कई ऐसी शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिनके कारण बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन नहीं कर सके। विभाग ने प्रशासनिक और स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए अलग-अलग नियम बनाए हैं। जहां प्रशासनिक तबादलों में अपेक्षाकृत कम प्रतिबंध हैं, वहीं स्वैच्छिक में निर्धारित शर्तों के कारण अधिकांश शिक्षक पात्रता से बाहर हो गए। कई शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को भी आवेदन की संख्या कम है।
प्रभारी मंत्री से मंजूर तबादला भी पोर्टल में अटका
स्थानांतरण प्रक्रिया के बीच तकनीकी खामियों के मामले भी सामने आए हैं। मुरैना जिले के शिक्षक कौशल शर्मा का तबादला प्रभारी मंत्री की स्वीकृत सूची में शामिल होने के बावजूद लंबित है। आरोप है कि वर्ग-3 प्रयोगशाला शिक्षक (विज्ञान) का पद रिक्त होने के बाद भी स्थानांतरण पोर्टल पर संबंधित विकल्प प्रदर्शित नहीं हुआ, जिससे प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उनका तबादला पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए स्वीकृत किया गया था। मामले की शिकायत विभागीय अधिकारियों तक की गई, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो पाया है।
शिक्षक संगठन ने उठाए विसंगतियों के मुद्दे
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि स्थानांतरण नीति-2026 में कई तकनीकी और व्यावहारिक विसंगतियां हैं। उनके अनुसार पोर्टल पर कई शिक्षकों की सेवा संबंधी जानकारी गलत प्रदर्शित हुई, अनेक पात्र शिक्षकों को अपात्र बताया गया तथा रिक्त पदों की जानकारी भी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई।
विभाग ने हाईकोर्ट में दायर की कैवियट
स्थानांतरण आदेश जारी होने से पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट में कैवियट दायर कर दी है। विभाग को आशंका है कि स्थानांतरण आदेशों के खिलाफ शिक्षक न्यायालय का रुख कर सकते हैं। ऐसे में विभाग ने यह कदम उठाया है, ताकि किसी भी याचिका पर सुनवाई के दौरान उसका पक्ष भी प्रभावी रूप से रखा जा सके।
स्थानांतरण आदेश जारी होने से पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट में कैवियट दायर कर दी है। अब स्वैच्छिक आवेदन के लिए तारीख बढ़ने की संभावना नहीं है।- केके द्विवेदी, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय