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व्यापमं कंप्यूटर खरीदी घोटाला: भोपाल कोर्ट के रिकॉर्ड रूम में रखी फाइलें खा गई दीमक, 18 साल पुराने केस में फोटोकॉपी से होगी सुनवाई

भोपाल की विशेष अदालत में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने बताया कि मामले से जुड़े मूल शासकीय दस्तावेज रिकार्ड रूम में रखे थे, जिन्हें दीमक ने नष्ट कर दिया है।

By naman MishraEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 05:39:12 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 05:39:12 PM (IST)
व्यापमं कंप्यूटर खरीदी घोटाला: भोपाल कोर्ट के रिकॉर्ड रूम में रखी फाइलें खा गई दीमक, 18 साल पुराने केस में फोटोकॉपी से होगी सुनवाई
व्यावसायिक परीक्षा मंडल, भोपाल। फाइल फोटो।

HighLights

  1. व्यापमं के 18 साल पुराने कंप्यूटर खरीदी घोटाले का मामला
  2. कोर्ट के रिकॉर्ड रूम में रखे मूल दस्तावेज दीमक से नष्ट हो गए
  3. फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लिया गया है

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । व्यावसायिक परीक्षा मंडल के 18 साल पुराने कंप्यूटर खरीदी घोटाले में अब मूल दस्तावेजों के बजाय उनकी फोटोकॉपी के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी। भोपाल की विशेष अदालत में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने बताया कि मामले से जुड़े मूल शासकीय दस्तावेज रिकार्ड रूम में रखे थे, जिन्हें दीमक ने नष्ट कर दिया है।

मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण ईओडब्ल्यू ने उनकी फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने का आवेदन दिया था। विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह की अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया है।

ईओडब्ल्यू की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2008 में जब मामले का चालान पेश किया गया था, तब मूल दस्तावेजों से ही मशीन के माध्यम से उनकी फोटोकॉपी तैयार कराकर अदालत में जमा की गई थी। चालान के साथ इन छायाप्रतियों की प्रतियां बचाव पक्ष को भी उपलब्ध कराई गई थीं।


इसके बाद मूल दस्तावेज रिकार्ड रूम में सुरक्षित रखे गए थे। लंबे समय बाद रिकार्ड रूम में रखे दस्तावेज दीमक से नष्ट हो गए। अब उनके दोबारा मिलने की संभावना नहीं है।

बचाव पक्ष ने प्रामाणिकता पर उठाए सवाल

आरोपित पक्ष ने मूल दस्तावेज नष्ट होने पर आपत्ति जताई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संदीप गुप्ता ने बताया कि रिकॉर्ड रूम में रखे कई महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज दीमक खा गई हैं।

ऐसे में अब उपलब्ध फोटोकॉपी के आधार पर ही मामले की सुनवाई होगी। बचाव पक्ष ने फोटोकापी की प्रामाणिकता और मूल दस्तावेजों के नष्ट होने की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए।

अदालत ने माना कि चालान पेश किए जाने के समय मूल दस्तावेजों से तैयार की गई छायाप्रतियां रिकॉर्ड पर मौजूद हैं और उनकी प्रतियां बचाव पक्ष को पहले ही दी जा चुकी थीं।

इसके आधार पर अदालत ने फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में रिकार्ड में शामिल करने की अनुमति दे दी। मामले में विवेचक के शेष मुख्य परीक्षण के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है।

यह भी पढ़ें- व्यापम निधि पर विधानसभा में हंगामा, 1 करोड़ बेरोजगारों की फीस से जुटाए ₹297 करोड़ शिक्षा विभाग को ट्रांसफर, आंकड़ों पर उठे सवाल

16 में से पांच आरोपितों की हो चुकी मौत

यह मामला वर्ष 2008 से अदालत में लंबित है। करीब 18 साल की अवधि में 16 आरोपितों में से पांच की मौत हो चुकी है। इनमें अरुण गुप्ता, पी. प्रकाश राव, अरुण कुमार कालिया, रमेश दुबे और तुलसीदास अग्रवाल शामिल हैं।

वर्तमान में वीसी दुबे, आशीष साहू, डॉ. एके श्रीवास्तव, योगेशचंद्र उपरीत, यूएस विजयवर्गीय, अशोक मिश्रा, ओपी सोनी, ओपी टिकारिया, अजय सेन, नितिन महिंद्रा और जावेद अख्तर के खिलाफ मामला चल रहा है। एक आरोपित राधा बैलानी फरार है।

78 कंप्यूटर और सर्वर की खरीदी में गड़बड़ी का आरोप

ईओडब्ल्यू के अनुसार वर्ष 2008 में व्यापमं द्वारा 78 कंप्यूटर और सर्वर खरीदे गए थे। जांच में आरोप लगाया गया था कि कंप्यूटरों की खरीदी बाजार मूल्य से करीब दोगुनी दर पर की गई। टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर संबंधित फर्म को लाभ पहुंचाने का आरोप है।

इससे सरकारी खजाने को करीब 43 लाख रुपये का नुकसान होने की बात जांच में सामने आई थी। शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच की थी।