
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अस्थायी तौर पर अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों के लिए हरियाणा मॉडल लागू करने की तैयारी में है। उच्च शिक्षा विभाग ने सात सदस्यों की समिति गठित की है, जो हरियाणा मॉडल का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश करेगी। बताया जा रहा है कि हरियाणा मॉडल लागू होने से प्रदेश में अतिथि विद्वानों का वेतन डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगा, वहीं सेवानिवृत्ति की आयु तक उनकी सेवाएं बनी रहेंगी।
उच्च शिक्षा में प्राध्यापकों की नियमित भर्ती कम होने से शिक्षकों की कमी हो गई थी। शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए जन भागीदारी समितियों के जरिये तदर्थ प्राध्यापकों की भर्ती 1990 के दशक में शुरू हुई थी। वर्ष 2000 के बाद इसमें तेजी आई। मध्य प्रदेश में ऐसे अतिथि विद्वानों को 2000 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। अवकाश के दिनों का मानदेय नहीं बनने से अतिथि विद्वानों को अधिकतर 40 हजार 44 हजार रुपया प्रतिमाह ही मिल पाता है। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश और तीन ऐच्छिक अवकाश की पात्रता है। अगर रिक्त स्थान पर नियमित भर्ती का प्राध्यापक आ गया तो अतिथि विद्वानों को बिना किसी विकल्प के बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के एक प्रदर्शन में प्रत्येक माह एकमुस्त 50 हजार रुपया मानदेय देने की घोषणा की थी, जिसे लागू नहीं किया गया। हरियाणा में यूजीसी पात्र विद्वानों को 57,700 बताया जा रहा है कि हरियाणा में पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले यूजीसी पात्र अतिथि विद्वानों को 57,700 रुपये वेतन और सेवानिवृत्ति की आयु तक स्थायित्व प्रदान किया गया है।
एमपी अतिथि विद्वान महासंघ के अध्यक्ष डॉ. देवराज सिंह और डॉ. आशीष पांडेय ने कहा कि मध्य प्रदेश में कार्यरत 4500 विद्वानों में से 3700 यूजीसी योग्यता पूरी करते हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस समिति का गठन किया गया है, वह हरियाणा में अतिथि विद्वानों की सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व से जुड़े बिंदुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देंगी।
समिति की संयोजक शासकीय एमएलबी महाविद्यालय भोपाल की प्रोफेसर डॉ. भारती जैन बनाई गई हैं। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के डॉ. एचके गर्ग, डॉ. अजय कुमार भारद्वाज, सरोजिनी नायडू कन्या महाविद्यालय की डॉ. सीमा हाडिकर व डॉ. डेनीयल ग्लांस डेनी, शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. भूपेंद्र झा और शासकीय एमएलबी महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. भूपेंद्र झा सदस्य के तौर पर शामिल हैं।