
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के लगभग 12 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए वर्ष 2019 से प्रस्तावित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना अभी भी उलझी है। नई उलझन आपातकालीन चिकित्सा प्रतिपूर्ति को लेकर है।
अभी प्रस्ताव था कि आपातकालीन स्थिति में पांच लाख रुपये तक का उपचार गैर-अनुबंधित अस्पताल में कराया जा सकेगा, जिसकी बाद में योजना के अंतर्गत प्रतिपूर्ति कर दी जाएगी। प्रस्तावित योजना को लेकर हाल ही में हुई बैठक में विभाग के अधिकारी इसे लेकर एक राय नहीं थे।
कुछ का कहना है कि प्रतिपूर्ति की सीमा डेढ़ से दो लाख रुपये तक ही रखनी चाहिए। कर्मचारी की हालत में कुछ सुधार (स्टेबल) होने पर उसे अनुबंधित अस्पताल में रेफर किया जाए। इस दृष्टि से दो लाख रुपये पर्याप्त हैं। इसका दुरुपयोग न हो, इसलिए कुछ अधिकारी पांच लाख रुपये की राशि पर असहमत हैं।
बता दें, प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना का संचालन करने वाली स्टेट हेल्थ एजेंसी ने इसका ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें पेंशनरों को भी शामिल किया जा रहा है। कर्मचारी और पेंशनरों के लिए प्रीमियम की राशि अलग-अलग होगी। वहीं, निर्धारित प्रीमियम देने पर निगम, मंडल और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को भी योजना में सम्मिलित किया जा सकेगा।
योजना का प्रारूप स्वीकृति के लिए इसी माह कैबिनेट में प्रस्तुत करने की तैयारी थी, पर परिवार चिकित्सा प्रतिपूर्ति और पेंशनरों के परिवार की परिभाषा सहित कई विषयों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
बता दें, योजना में 20 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा अनुबंधित अस्पतालों में उपलब्ध कराने का प्रावधान किया जा रहा है। आपातकालीन स्थिति में कर्मचारी पास के गैर-अनुबंधित अस्पताल में उपचार कराते हैं तो उन्हें खर्च की प्रतिपूर्ति देने का भी प्रावधान है। इसकी राशि तय किए जाने का निर्णय अटका हुआ है।