'स्कैनर पर काले रिबन, नकद में हुआ कारोबार'; भोपाल में व्यापारियों का 'No UPI Day', 1 करोड़ के व्यापार पर असर
भोपाल के हनुमानगंज-जुमेराती में चावल-दाल व्यापारियों ने गुरुवार को यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किया। व्यापारी संघ के अनुसार, इससे करीब एक करोड़ रुपये क...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 11:02:18 AM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 11:02:18 AM (IST)
स्कैनर पर काला रिबन बांधकर व्यापारियों ने मनाया नो यूपीआई डे। सौ- आयोजकHighLights
- नो यूपीआई डे से एक करोड़ रुपये के कारोबार पर असर
- स्कैनर पर काले रिबन बांधे, दुकानों पर विरोध के पोस्टर लगाए
- दशहरे के बाद आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क के विरोध में गुरुवार को हनुमानगंज-जुमेराती के चावल-दाल व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया।
व्यापारियों ने दिनभर यूपीआई से भुगतान स्वीकार नहीं किया और ग्राहकों से नकद भुगतान करने को कहा।
एक करोड़ का नुकसान
चावल-दाल व्यापारी संघ के अनुसार, इस अभियान के चलते यूपीआई के जरिए लेन-देन नहीं करने पर करीब एक करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ा। ऑनलाइन भुगतान करने पहुंचे कुछ ग्राहकों के पास नकदी नहीं थी, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्कैनर पर बांधे काले रिबन
व्यापारियों ने दुकानों पर एमडीआर शुल्क के विरोध में पोस्टर लगाए और यूपीआई स्कैनर पर काले रिबन बांधे। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के समर्थक हैं, लेकिन अतिरिक्त शुल्क से उनकी लागत बढ़ेगी।
थोक व्यापारी अभिषेक साहू ने कहा कि व्यापारी पहले से जीएसटी, आयकर और मंडी टैक्स सहित कई शुल्क दे रहे हैं। एमडीआर शुल्क से आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिसकी भरपाई के लिए सामान महंगा हो सकता है। इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा।
दशहरे के बाद आंदोलन की तैयारी
चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने कहा कि ‘नो यूपीआई डे’ सरकार तक व्यापारियों की मांग पहुंचाने का शांतिपूर्ण प्रयास है। उपाध्यक्ष विपिन सिंघई और व्यापारी शंकर सचदेवा व शैलेंद्र लचकिया ने भी प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है तो इसकी लागत उन पर नहीं डाली जानी चाहिए। यदि सरकार ने प्रस्ताव पर पुनर्विचार नहीं किया, तो दशहरे के बाद आंदोलन की रणनीति बनाई जा सकती है।