
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। भोपाल की बहू और नोएडा की बेटी 33 वर्षीय पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा का अंतिम संस्कार 24 मई 2026 की शाम भोपाल के भदभदा श्मशान घाट में किया गया। उनकी चिता को उनके भाई इंडियन आर्मी मेजर हर्षित शर्मा ने मुखाग्नि दी। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि त्विषा का निधन 12 मई को हुआ था, लेकिन उनका अंतिम संस्कार मौत के 13वें दिन यानी तेरहवीं वाले दिन संपन्न हुआ।
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त्विषा शर्मा केस (Twisha Sharma death Case) ने 13 दिनों तक लगातार नया मोड़ लिया। दहेज हत्या के आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल, पति समर्थ सिंह की गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान तक यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना रहा।
भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में 11 और 12 मई की दरम्यानी रात त्विषा शर्मा का शव जिम्नास्टिक हुक से फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
12 मई की सुबह भोपाल एम्स में त्विषा के शव का पोस्टमार्टम किया गया। हालांकि, परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भरोसा नहीं जताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद शव को एम्स भोपाल की मोर्चुरी में सुरक्षित रखा गया।
घटना के अगले दिन परिजनों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर हंगामा किया। उन्होंने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह पर दहेज हत्या का आरोप लगाया। देर रात मामले में FIR दर्ज की गई। इसी दिन रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी दायर किया।
14 मई को निचली अदालत ने गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने उनकी बढ़ती उम्र को आधार मानते हुए 50 हजार रुपये के मुचलके पर राहत दी।

त्विषा के परिवार ने एम्स भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को मानने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप था कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही है।
16 मई को परिजनों ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने और जांच दिल्ली से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की मांग की। इसके बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
परिजनों ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। बाद में मुख्यमंत्री के OSD से मुलाकात हुई, जहां उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला।
पति समर्थ सिंह ने भी अग्रिम जमानत के लिए भोपाल कोर्ट में आवेदन लगाया था, लेकिन अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई।
पुलिस ने 19 मई को समर्थ सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया ताकि वह देश छोड़कर विदेश न भाग सके।
भोपाल कोर्ट ने एम्स प्रशासन को शव सुरक्षित रखने के निर्देश दिए ताकि वह खराब न हो। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को देखते हुए यह आदेश दिया गया।
फरार चल रहे समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने इनाम राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी।
22 मई को समर्थ सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की, लेकिन भोपाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
त्विषा शर्मा केस में 23 मई को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली बेंच ने 25 मई को सुनवाई तय की।
24 मई : दोबारा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार 24 मई को दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम ने भोपाल एम्स में त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव मायके पक्ष को सौंप दिया गया। शाम को भोपाल के भदभदा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
त्विषा शर्मा की भोपाल निवासी समर्थ सिंह से पहचान साल 2024 में एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी। दोनों ने 9 दिसंबर 2025 को शादी की थी। शादी के बाद त्विषा गर्भवती हुईं, लेकिन बाद में उनका गर्भपात हो गया। परिजनों के अनुसार, व्हाट्सएप चैट में समर्थ सिंह द्वारा बच्चे को लेकर शक और ताने देने की बातें भी सामने आई हैं।
त्विषा शर्मा मनोरंजन और कॉर्पोरेट जगत का चर्चित चेहरा थीं। उन्होंने मॉडलिंग से करियर शुरू किया और बाद में तेलुगु फिल्मों व शॉर्ट फिल्मों में अभिनय किया। साल 2021 में तेलुगु फिल्म ‘मुग्गुरू मोनागल्लू’ में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। इससे पहले 2018 में हिंदी शॉर्ट फिल्म ‘जरा संभल के’ में भी अभिनय किया था।
मॉडलिंग करियर के दौरान उन्होंने 2012 में ‘मिस पुणे’ का खिताब जीता। उन्होंने डोव और लोरियल जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के विज्ञापनों में भी काम किया था।
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त्विषा ने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से BBA और NMIMS CDOE से MBA किया था। उन्होंने ‘फ्लॉवर पॉट एंड फूड’ में मार्केटिंग मैनेजर और DADB में कम्युनिकेशन एंड ऑन-बोर्डिंग मैनेजर के रूप में भी काम किया।
हिंदू धर्म में मृत्यु के 13वें दिन किए जाने वाले संस्कार को तेरहवीं कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आत्मा की आगे की यात्रा के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। इसे शोक की समाप्ति और परिवार के सामान्य जीवन में लौटने का प्रतीक भी माना जाता है।