
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। त्विषा शर्मा मौत मामले में आरोपित व मृतका की सास पूर्व जज गिरीबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई से पहले मामला लगातार कई अदालतों में स्थानांतरित होता रहा। अंततः शुक्रवार देर शाम को न्यायालय में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
गिरीबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी 20 जुलाई 2026 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव की अदालत में प्रस्तुत की गई थी। प्रारंभिक सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित थी।
इसके बाद मामला पहले 10वीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत भेजा गया, लेकिन उनके अवकाश पर होने के कारण प्रकरण वापस प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पास पहुंच गया।
इसके बाद यह मामला 8वीं जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेखा मिश्रा की अदालत भेजा गया। उन्होंने यह कहते हुए स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया।
यह बताया था कि वह समर्थ सिंह के संगीत, विवाह और रिसेप्शन समारोह में शामिल हो चुकी हैं तथा इसी कारण पहले भी अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुकी थीं। मामला फिर 11वीं जिला व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव की अदालत भेजा गया।
उन्होंने भी यह कहते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया कि समर्थ सिंह उनके एक व्यक्तिगत प्रकरण में राज्य उपभोक्ता आयोग के समक्ष अधिवक्ता के रूप में पेश हो रहे हैं, इसलिए निष्पक्षता की दृष्टि से वह इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगी।
इसके बाद प्रकरण विशेष सीबीआई न्यायालय भेजा गया, जहां पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई 24 जुलाई के लिए निर्धारित की गई। शुक्रवार को मामला पुनः 10वीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत भेजा गया, लेकिन उनके अवकाश पर रहने के कारण फाइल जिला व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीलम शुक्ला के समक्ष रखी गई।
नीलम शुक्ला ने यह कहते हुए स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया कि उन्होंने ग्वालियर में गिरीबाला सिंह के अधीन प्रशिक्षण प्राप्त किया था, इसलिए वह इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकतीं।
इसके बाद प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर मामला विशेष सीबीआई न्यायालय के न्यायाधीश राम प्रकाश मिश्रा की अदालत में भेजा गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गिरीबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।