• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

बड़े तालाब में बिना परमिशन सिंघाड़े की खेती पर बवाल, NGT ने कसी नकेल, IARI करेगा फसल की जांच

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जीवनरेखा बड़ा तालाब में सिंघाड़े की खेती और कीटनाशकों के संभावित इस्तेमाल पर अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निगर...और पढ़ें

By Madanmohan malviyaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 09:10:18 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 09:10:18 AM (IST)
बड़े तालाब में बिना परमिशन सिंघाड़े की खेती पर बवाल, NGT ने कसी नकेल, IARI करेगा फसल की जांच
बड़ा तालाब में बिना परमिशन सिंघाड़े की खेती पर बवाल (फाइल फोटो)

HighLights

  1. बड़ा तालाब में बिना अनुमति हो रही सिंघाड़े की खेती
  2. एनजीटी का शिकंजा, तीन महीने में खुलेगा रसायनों का राज
  3. अब आईएआरआई करेगा फसल की जांच

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी की जीवनरेखा बड़ा तालाब में सिंघाड़े की खेती और कीटनाशकों के संभावित इस्तेमाल पर अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निगरानी का शिकंजा कस दिया है। झील के पानी के नमूने में कीटनाशकों के अवशेष नहीं मिलने के बावजूद एनजीटी ने खतरे की आशंका को खारिज नहीं किया है। अब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) तीन महीने के भीतर सिंघाड़े की फसल की जांच कर पता लगाएगा कि उसमें कीटनाशक और हानिकारक रसायन मौजूद हैं या नहीं।

सबसे अहम सवाल यह है कि जब मत्स्य विभाग ने सिंघाड़े की खेती की अनुमति ही नहीं दी, तो झील में यह गतिविधि किस आधार पर चल रही है?आठ अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में एनजीटी ने स्पष्ट किया कि किसी एक स्थान और समय पर लिए गए पानी के नमूने से पूरी झील में कीटनाशकों के इस्तेमाल या उनकी अनुपस्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसलिए फसल की जांच के साथ पानी की नियमित निगरानी और खेती में पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


पानी की रिपोर्ट में राहत, लेकिन पूरी झील पर निष्कर्ष नहीं

संयुक्त समिति ने एक अक्टूबर को बैरागढ़ स्थित बोरवन पार्क के पास झील का निरीक्षण किया था। यहां कमल और सिंघाड़े की खेती होती मिली। नावों से कमल के फूल एकत्र किए जा रहे थे, लेकिन मौके पर कीटनाशकों का छिड़काव करते कोई व्यक्ति या उपकरण नहीं मिला। पानी के नमूने में कीटनाशकों के अवशेष भी नहीं पाए गए। नमूने में घुलित ऑक्सीजन 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर, बीओडी 2.4 और सीओडी 9.6 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जनवरी से अगस्त 2026 तक की निगरानी में बैरागढ़ इंटेक वेल पर घुलित ऑक्सीजन का औसत 6.49 और बीओडी का औसत 1.45 मिलीग्राम प्रति लीटर रहा। नियमित जांच में कीटनाशक और भारी धातुएं भी नहीं मिलीं।

पट्टा मछली पालन का, फिर सिंघाड़े की खेती कैसे?

सुनवाई में सामने आया कि नगर निगम ने भोजपाल मत्स्य सहकारी समिति को बड़ा तालाब में मछली पालन और मछली पकड़ने के लिए 10 साल का पट्टा दिया है। हालांकि, मत्स्य विभाग ने सिंघाड़े की खेती के लिए अनुमति नहीं दी है। ऐसे में खेती की गतिविधियों के नियमन और पर्यावरणीय शर्तों के पालन का सवाल अहम हो गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर जलकुंभी भी मिली। हालांकि, मौके पर मरी हुई मछलियां नहीं मिलीं और बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत की लिखित शिकायत भी समिति के सामने नहीं थी। इसके बावजूद जलकुंभी का घना फैलाव पानी में ऑक्सीजन घटाकर जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है।

भोज वेटलैंड के नियमों का पालन जरूरी

एनजीटी ने भोज वेटलैंड के प्रभाव क्षेत्र में गतिविधियों को नियंत्रित करने संबंधी राज्य पर्यावरण विभाग के 16 मार्च 2022 के आदेश का उल्लेख किया है। सिंघाड़े की खेती और कटाई में लागू नियमों का पालन जरूरी होगा। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा रासायनिक कीटनाशकों के पानी और जलीय जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच के घेरे में बड़ा तालाब

तीन महीने में रिपोर्ट: आइएआरआइ सिंघाड़े की फसल में कीटनाशकों और हानिकारक रसायनों की मौजूदगी की जांच करेगा।

पानी की नियमित जांच: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड झील के पानी की गुणवत्ता पर निगरानी जारी रखेगा।

खेती की अनुमति पर सवाल: मत्स्य विभाग ने सिंघाड़े की खेती या अन्य जलीय कृषि के लिए अनुमति अथवा पट्टे की अनुशंसा नहीं की।

जैविक खेती पर जोर: नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जलकुंभी भी चिंता: झील में जलकुंभी का फैलाव जलीय पारिस्थितिकी के लिए खतरा बन सकता है।