
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मनरेगा की जगह लाई जा रही विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबीजीरामजी) योजना प्रदेश में भी एक जुलाई से प्रारंभ करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की तैयारी अंतिम चरण में है।
पंचायतों को कार्य की दृष्टि से तीन श्रेणियों में बांटा जा रहा है। एक, जिनमें कम कार्य कराने की आवश्यकता है, दूसरी मध्यम श्रेणी की और तीसरी जिनमें विकास के अधिक काम कराए जाने की आवश्यकता है। योजना को प्रदेश में लागू करने के लिए शीघ्र ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। बता दें, देशभर में एक जुलाई से योजना प्रारंभ की जा रही है। राज्यों ने कुछ बदलाव भी अपने स्तर पर किए हैं।
योजना में रोजगार गारंटी सौ की जगह 125 दिन की गई है। गड़बड़ी रोकने के भी कई प्रयास किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत यह प्रावधान भी किया जा रहा है कि काम नहीं मिलने की स्थिति में श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा जो सीधा उनके खातों में पहुंचेगा। मजदूरी भुगतान 15 दिवस में किया जाएगा। केंद्र ने योजना के अंतर्गत कुछ राशि भी मप्र सहित सभी राज्यों को दी है।
यह भी पढ़ें- इंदौर के नाम एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड, जल संरक्षण के लिए हुई देश की सबसे छोटी रन 'मिनी थान', गिनीज बुक में नाम दर्ज
अभी योजना का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) किया जाता है। अब योजना में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था की जा रही है। इसमें कार्य निष्पादन और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं।
मनरेगा में दूसरी दिक्कत यह थी कि केंद्र के हिस्से की राशि आने में विलंब होता था, जिससे मजदूरी भुगतान नहीं हो पाता था और काम भी रुक जाते थे।