भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में गृह निर्माण सहकारी समिति (हाउसिंग सोसायटी) की धोखाधड़ी के शिकार लोगों को सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। उन्हें पात्रता के आधार पर भूखंड दिलाए जाएंगे। अवैधानिक रूप से समितियों द्वारा बेची गई भूमि वापस ली जाएगी। रजिस्ट्री निरस्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन दिए जाएंगे। धोखाधड़ी करने वाले समिति पदाधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए सहकारिता विभाग सभी जिला उप पंजीयकों से गड़बड़ी करने वाली समितियों की जानकारी जुटा रहा है। प्रदेश में 2,147 गृह निर्माण सहकारी समितियां हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन की समितियों से जुड़ी गड़बड़ियों की पांच हजार से अधिक शिकायतें हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समितियों द्वारा अवैध रूप से बेची गई भूमि को वापस लेकर पात्र सदस्यों को दिलाने की घोषणा की थी।

इसके मद्देनजर सहकारिता विभाग ने सदस्यों के साथ धोखाधड़ी करने वाली समितियों की जानकारी जिला उप पंजीयकों से मांगी है। विभाग ने रणनीति बनाई है कि जिलों से रिपोर्ट आने के बाद इन्हें विधिक प्रकोष्ठ को परीक्षण के लिए दिया जाएगा। ऐसे मामले, जिनमें सहकारी अधिनियम की धारा 72 का उल्लंघन हुआ है, उनमें भूमि वापस लेने की कार्रवाई के साथ समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआइआर भी कराई जाएगी। सदस्यता सूची में हेरफेर करने वाली समितियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। सहकारिता विभाग के संयुक्त पंजीयक अरविंद सिंह सेंगर ने बताया कि समिति की भूमि बेचने के मामले में उप पंजीयकों से रिपोर्ट मांगी गई है। इसे लेकर एक बार बैठक हो चुकी है। सभी अधिकारियों को स्मरण पत्र भी जारी किया गया है कि वे गड़बड़ी करने वाली समितियों की जानकारी जल्द से जल्द दे दें, ताकि कार्रवाई की जा सके।

रोहित गृह निर्माण समिति ने 126 भूखंड में की गड़बड़ी : भोपाल की रोहित गृह निर्माण सहकारी समिति ने 126 भूखंड अवैधानिक तरीके से बेच दिए। पात्र सदस्यों की जगह अपात्रों को न सिर्फ भूखंड का आवंटन किया बल्कि उनकी रजिस्ट्री भी करा दी। इसी तरह पंचसेवा समिति ने 74 एकड़ भूमि में से अधिकांश हिस्सा बेच दिया। स्वजन सहकारी समिति ने तो राज्य सहकारी आवास संघ से जिस भूमि पर एक करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया, वहां सीधे अविकसित भूमि बेच दी। रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए सहकारिता विभाग को अलग-अलग प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत करने होंगे। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इसमें स्टाम्प ड्यूटी संपत्ति के मूल्य का 13 फीसद लगती है। रोहित गृह निर्माण समिति के 126 भूखंड की रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए समिति के पास स्टाम्प ड्यूटी चुकाने लायक राशि ही नहीं है। इसे देखते हुए विधि विभाग को प्रस्ताव दिया गया था कि स्टाम्प ड्यूटी से छूट दी जाए।

क्या कहती है धारा 72 (बी)

पंजीयक की अनुमति के बिना भूमि का विक्रय नहीं कर सकती है। धारा 72 डी (9) में इसे अपराध कहा गया है। धारा 72 ई (डी) में कहा गया है कि इस अपराध पर तीन साल की सजा और पांच लाख रुपये का जुर्माना किया जा सकता है।

Posted By: Prashant Pandey

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