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कपड़ा बाजार पर युद्ध की मार... सिंथेटिक कपड़ों के दाम 15% तक उछले, सूरत की मिलों में उत्पादन ठप

श्चिम एशिया में जारी युद्ध और नाकाबंदी का असर अब कपड़ा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। शूटिंग, शर्टिंग और सिंथेटिक कपड़ों की आवक अचानक कम हो गई है।

By dilip mangtaniEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 05:46:43 PM (IST)Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 05:46:43 PM (IST)
कपड़ा बाजार पर युद्ध की मार... सिंथेटिक कपड़ों के दाम 15% तक उछले, सूरत की मिलों में उत्पादन ठप
कपड़ा बाजार पर युद्ध की मार

HighLights

  1. पश्चिम एशिया संकट से सिंथेटिक कपड़ों की आपूर्ति घटी
  2. बाजार में 7-15% तक बढ़े कपड़ों के दाम
  3. सूरत मिलों में उत्पादन कम, कुछ इकाइयां बंद

दिलीप मंगतानी, नवदुनिया, भोपाल। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और नाकाबंदी का असर अब कपड़ा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। शूटिंग, शर्टिंग और सिंथेटिक कपड़ों की आवक अचानक कम हो गई है, जिससे बाजार में कीमतों में 7 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रदेश की प्रमुख कपड़ा मंडियों में शामिल संत हिरदाराम नगर कपड़ा मंडी में भी इसका असर साफ नजर आ रहा है। यहां सालाना करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जिसमें मार्च से मई के सीजन में ही लगभग 200 करोड़ रुपये का व्यापार होता है।


आपूर्ति बाधित, उत्पादन पर असर

मंडी में आने वाला अधिकांश माल सूरत की कपड़ा मिलों से आता है, लेकिन वहां कुछ मिलें पिछले एक सप्ताह से बंद हैं। इसका मुख्य कारण पेट्रोकेमिकल आधारित सिंथेटिक फाइबर की आपूर्ति का ठप्प होना है।

पालिएस्टर और अन्य सिंथेटिक कपड़े पेट्रोलियम से जुड़े रसायनों से तैयार होते हैं, जिनका आयात पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों से होता है। युद्ध के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन कम हो गया है और कीमतें बढ़ रही हैं।

कपड़ों में दिखने लगी कमी

इस संकट का सबसे ज्यादा असर सिंथेटिक साड़ियों, लहंगे और ड्रेस मटेरियल पर पड़ा है। इसके अलावा पर्दा क्लॉथ, स्पन कपड़ा, शूटिंग, शर्टिंग और लिनेन भी महंगे हो गए हैं।

फिलहाल आंशिक राहत

कपड़ा डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार मिलों के पास पहले से मौजूद स्टॉक के कारण अभी कीमतों में सीमित बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर होने से परिवहन लागत भी नहीं बढ़ी है। हालांकि यदि ईंधन महंगा हुआ तो कपड़ों के दाम और बढ़ सकते हैं।

सूती-रेशमी कपड़े सस्ते हो सकते हैं

व्यापारियों के मुताबिक भारतीय सूती और रेशमी कपड़ों के दाम फिलहाल स्थिर हैं। निर्यात प्रभावित होने के कारण यह माल घरेलू बाजार में आ सकता है, जिससे आने वाले समय में इनके दाम घटने की संभावना है।

व्यापारियों की राय

मोहन त्रिकोटिया, क्लॉथ डिस्ट्रीब्यूटर, सूरत-

सूरत की मिलों में यार्न की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे उत्पादन घटा है। काम नहीं होने से मजदूरों का पलायन भी शुरू हो गया है और कुछ मिलें अस्थायी रूप से बंद हैं।

अमित बिनवानी, कपड़ा उद्यमी, सूरत-

यार्न, केमिकल, गंधक और एसिड के दाम 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे प्रोसेसिंग लागत बढ़ी है और मिलें नए ऑर्डर लेने से बच रही हैं।

कन्हैया इसरानी, अध्यक्ष, थोक वस्त्र व्यवसाय संघ-

सीजन के लिए पहले से स्टॉक होने के कारण पुराना माल पुराने दाम पर बेचा गया, लेकिन नया माल 15 प्रतिशत तक महंगा आ रहा है, जिससे कारोबार पर असर पड़ सकता है।

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