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एमपी में ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस... भोपाल-बीना-इटारसी रूट पर बदलेंगे 87 टर्नआउट और स्लीपर

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने भोपाल-संत हिरदाराम नगर और बीना-इटारसी रेलखंड पर इस काम के लिए करीब 4.08 करोड़ रुपए तय किए हैं। इसके तहत 14 सेट टर्न...और पढ़ें

By anjali tomarEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 06:26:01 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 06:26:01 PM (IST)
एमपी में ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस... भोपाल-बीना-इटारसी रूट पर बदलेंगे 87 टर्नआउट और स्लीपर
भोपाल-बीना-इटारसी रूट पर बदलेंगे 87 टर्नआउट और स्लीपर

HighLights

  1. भोपाल मंडल के दो रेलखंडों पर पटरियों के मोड़ बदले जाएंगे
  2. ₹4.08 करोड़ की लागत से 18 महीने में पूरा होगा मरम्मत कार्य
  3. 14 सेट टर्नआउट स्लीपर और 87 सेट टर्नआउट बदले जाएंगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल मंडल में ट्रेनों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए दो रेलखंडों पर पटरियों के मोड़ वाले हिस्सों को बदला जाएगा। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने भोपाल-संत हिरदाराम नगर और बीना-इटारसी रेलखंड पर इस काम के लिए करीब 4.08 करोड़ रुपए तय किए हैं। इसके तहत 14 सेट टर्नआउट स्लीपर और 87 सेट टर्नआउट बदले जाएंगे। इस काम को 18 महीने में पूरा किया जाएगा।

रेलवे ट्रैक पर जहां से ट्रेन एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाती है, उस हिस्से को टर्नआउट कहते हैं। यह ट्रैक का अहम हिस्सा होता है। इसके जरिए ट्रेन को दूसरी लाइन पर भेजा जाता है। लगातार ट्रेनों की आवाजाही और भारी वजन के कारण समय के साथ इन हिस्सों के स्लीपर और अन्य उपकरणों में घिसावट हो सकती है। ऐसे में इनकी स्थिति बेहतर बनाए रखने के लिए समय-समय पर इन्हें बदलना जरूरी होता है।


कमजोर हिस्सों को दुरुस्त कर ट्रैक को दी जाएगी मजबूती

इस काम के तहत टर्नआउट के साथ उससे जुड़े स्लीपर भी बदले जाएंगे। स्लीपर पटरियों को सही जगह पर टिकाए रखने और उनके बीच की दूरी बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं, टर्नआउट की मदद से ट्रेन का रास्ता बदला जाता है। इनके पुराने या खराब हिस्सों को बदलने से ट्रैक की मजबूती बनाए रखने में मदद मिलेगी।

ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही और ट्रैक की स्थिरता में मिलेगा बड़ा फायदा

पटरियों के मोड़ वाले हिस्से ठीक रहने से ट्रेनों को एक लाइन से दूसरी लाइन पर ले जाने में मदद मिलेगी। स्लीपर और टर्नआउट की स्थिति बेहतर होने से ट्रैक की स्थिरता बनी रहेगी। इससे इन हिस्सों में खराबी आने की आशंका कम करने और ट्रेनों की आवाजाही सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, समय पर रखरखाव होने से अचानक मरम्मत की जरूरत पड़ने की आशंका भी कम हो सकती है। हालांकि, इस काम से ट्रेनों की गति बढ़ेगी या समयपालन में सुधार होगा, यह ट्रैक की मौजूदा स्थिति और रेलवे के संचालन पर निर्भर करेगा।