Bhopal डिजिटल डेस्क, इंदौर। भारत विभाजन के बाद कई रियासतों ने भारत में रहना स्वीकार किया, लेकिन भोपाल का नवाब हमीदुल्लाह खां का पाकिस्तान की ओर ज्यादा झुकाव था और नवाब की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में थी। इस दौरान नवाब द्वारा लिए गए एक फैसले ने भोपाल का दिवाला निकाल दिया था।
दरअसल, बात साल 1948 की है। उस समय बैंक ऑफ भोपाल कार्य कर रहा था और भोपाल के लोगों की खासी जमा पूंजी भी इसमें जमा थी। उस समय नवाब का पाकिस्तानी प्रेम भी उफान मार रहा था, लिहाजा नवाब ने बैंक ऑफ भोपाल की एक शाखा कराची में खोल दी, इतना ही नहीं भोपाल का सारा धन भी पाकिस्तान ले गए। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत में बैंक ऑफ भोपाल का दिवालिया हो गया और लोगों की जमा पूंजी डूब गई।
भारत विभाजन के दौरान हैदराबाद का निजाम और भोपाल के नवाब का पाकिस्तानी प्रेम उफान मार रहा था। नवाब निजाम के साथ मिलकर भारत सरकार का विरोध कर रहा था और नवाब चाहते थे कि वे भारत के बीच रहकर पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखे, लेकिन भारत सरकार के सख्त रवैये के कारण ऐसा नहीं हो सका।
जब नवाब पर भोपाल की जनता और भारत सरकार का दबाव बढ़ा तो उसने मजबूरी में भारत विलय की स्वीकृति दे दी और बाद में भोपाल छोड़कर इंग्लैंड चला गया। जबकि नवाब की बड़ी बेटी पाकिस्तान में जाकर बस गई, जिन्हें पाकिस्तानी सरकार ने ब्राजील का राजदूत बना दिया।
नवाब हमीदुल्लाह खां आजादी से पूर्व नरेश मंडल के चांसलर थे। उनका लगाव मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना से था। जबकि नवाब कांग्रेस का कट्टर विरोधी भी था। इतना ही नहीं जब माउंटबेटन भारत के वायसराय नहीं थे, जब नवाब की उनसी अच्छी दोस्ती थी और वे साथ में गोल्फ खेलते थे। वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू तो नवाब के सबसे अच्छे दोस्त थे।
(Source: नईदुनिया नेटवर्क की पुरानी खबरों एवं मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी की किताब राजनीतिनामा मध्यप्रदेश 1956-2003 कांग्रेस युग से साभार)