भोपाल। 'वो चरित्रहीन' किताब समाज में महिलाओं की वास्तविक स्थिति बताती है। आज भी देश में महिलाओं को अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है। जब पुरूष किसी महिला को हरा नहीं पाता है तो वह अंतिम हथियार के रूप में उसके चरित्र पर अंगुली उठाता है।' लेखिका ज्योति सराफ ने नई किताब 'वो चरित्रहीन' में महिलाओं की स्थिति दर्शाने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि इस किताब को मैंने स्वप्रेरणा से लिखने का प्रयास किया। दुष्यंत कुमार पांडुलिपी संग्रहालय में शनिवार को इस किताब का विमोचन समारोह आयोजित किया गया।

महिलाओं के लिए बहुत कुछ

ज्योति ने बताया कि पुस्तक महिलाओं के चरित्र निर्माण के साथ उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने का काम बखूबी निभाती है। इसमें 20 शीर्षक हैं। धर्म की आड़ में अधर्म, औरत की असली पहचान, औरत ही औरत की दुश्मन, मर्दाना औरत जैसे शीर्षक आज के परिदृश्य में महिलाओं की वास्तविक स्थिति के बारे में बताते हैं। इस दौरान कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संवेदना मंच की अध्यक्ष मीरा सिंह ने कहा कि महिलाओं का सशक्त होना जरूरी है तभी वे एक स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहयोग कर सकती हैं। समाज सेविका प्रार्थना मिश्रा ने कहा कि समाज की वास्तविकता को सामने लाना जरूरी है। पुस्तक वो चरित्रहीन इस वास्तविकता को प्रभावी तौर पर सामने लाती है। एमके पोंडा कॉलेज ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट की प्रिंसिपल मंजू टेम्भरे ने कहा कि समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच सकारात्मक करनी होगी तब कहीं जाकर हम महिलाओं को पूर्ण रूप से सशक्त बना सकते हैं। कार्यक्रम में द हंटर प्रोजेक्ट की स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर शिवानी शर्मा ने कहा कि आज के दौर में पुरुष और महिलाओं को बराबरी का हक हासिल है। ऐसे में उन्हें सम्मान के साथ समाज में रहने का हक है। इस मौके पर बड़ी संख्या में साहित्यकार मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन कुलदीप सक्सेना ने किया।

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