
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। गोविंदपुरा इलाके में साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक महिला को डिजिटल अरेस्ट किया और उसे धमकाया कि उसके नाम से बैंक खाते में आतंकियों ने सात करोड़ रुपये जमा किए हैं। इसी का डर दिखाकर ठगों ने 35 लाख रुपये ठग लिए। आरोपितों ने वीडियो कॉल पर महिला को पुलिस मुख्यालय जैसा माहौल दिखाया और कहा कि उसे 45 दिन के लिए गिरफ्तार किया जाएगा। बच्चों को भी गिरफ्तारी की धमकी दी।
डर के कारण महिला ने अपनी जमा पूंजी और एफडी की रकम आरोपितों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। बाद में लगातार पैसों की मांग होने पर महिला को ठगी का एहसास हुआ। साइबर क्राइम की जांच रिपोर्ट के आधार पर गोविंदपुरा पुलिस ने सोमवार को केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, साकेत नगर निवासी उमा समद्दार एलआइसी और पोस्ट आफिस एजेंट हैं। 23 सितंबर 2025 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और महिला से कहा कि उसके नाम से एचडीएफसी बैंक में खाता खुला है।
इस खाते में आतंकियों ने सात करोड़ रुपये जमा किए हैं। इसके चलते पुलिस उसे गिरफ्तार करने वाली है। ऑनलाइन ठगें ने महिला से कहा कि गिरफ्तारी से बचना है तो अपनी जमा पूंजी बताए गए खातों में जमा कर दें, जिसे बाद में वापस कर दिया जाएगा। धमकी से घबराई महिला ने 29 सितंबर 2025 को 21 लाख 57 हजार 815 रुपये बताए गए खाते में जमा कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने उसकी एफडी तुड़वाकर दूसरे खाते में रकम जमा करने को कहा। महिला ने 15 अक्टूबर 2025 को करीब आठ लाख रुपये और ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपितों ने फिर रकम मांगी।
महिला ने उधार लेकर साढ़े तीन लाख रुपये और बाद में एक लाख रुपये भी बताए गए खातों में जमा कर दिए। इस तरह आरोपितों ने उससे करीब 35 लाख रुपये ऐंठ लिए। लगातार रकम मांगने पर महिला को संदेह हुआ और उसने साइबर क्राइम में शिकायत की। जांच में बैंक स्टेटमेंट, व्हाट्सएप चैट, वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट, रकम जमा करने की रसीदें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने आए।
एएसआई संजय शुक्ला ने बताया कि महिला ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत की थी। कार्रवाई के दौरान करीब 15 लाख रुपये खाते में होल्ड कराए गए थे। अब रकम चाहिए तो कोर्ट में एफआइआर की कापी लगेगी , इसलिए साइबर क्राइम की रिपोर्ट मिलने के बाद गोविंदपुरा पुलिस ने पूरे एक साल बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के आधार पर आरोपियों की पहचान और रकम के ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है।