
डिजिटल डेस्क। 18 अप्रैल अपनी जड़ों, पहचान और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर है। हर साल इस दिन विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है, जिससे लोग अपने आसपास मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व को समझें और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक हों।
भारत के मध्य में स्थित मध्य प्रदेश इस दृष्टि से बेहद खास है, क्यों यहां इतिहास सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। यहां किलों, मंदिरों, गुफाओं और परंपराओं में इतिहास जीवंत रूप से दिखाई देता है। ‘हार्ट ऑफ इंडिया’ कहलाने वाला यह राज्य अपनी समृद्ध विरासत, संरक्षण प्रयासों और विकास योजनाओं के कारण वैश्विक मंच पर एक मजबूत पहचान बना रहा है।
विश्व विरासत दिवस की शुरुआत वर्ष 1982 में International Council on Monuments and Sites द्वारा की गई थी, जिसे 1983 में UNESCO ने आधिकारिक मान्यता दी। इसका उद्देश्य दुनिया भर में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं है। यह भविष्य की जिम्मेदारी भी है।
विश्व धरोहर वे विशेष स्थल होते हैं, जिन्हें UNESCO उनके सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व के आधार पर मान्यता देता है। भारत में ऐसी कई धरोहरें हैं, जो विश्वभर में प्रसिद्ध हैं, जैसे ताजमहल, अजंता गुफाएं, एलोरा गुफाएं और कुतुब मीनार। ये स्थल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
हर वर्ष विश्व विरासत दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। 2026 की थीम है “संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया।” यह थीम बताती है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य संकटों के समय धरोहरों को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है।
मध्य प्रदेश को ‘हार्ट ऑफ इंडिया’ यूं ही नहीं कहा जाता। यहां इतिहास, संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सदियों से यह भूमि राजाओं, संतों और कलाकारों की कर्मभूमि रही है, जिसने इसे वैश्विक विरासत मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया है।
मध्य प्रदेश की तीन प्रमुख धरोहरें UNESCO की विश्व विरासत सूची में शामिल हैं:
इनके अलावा राज्य की 15 अन्य धरोहरें UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल हैं, जो वैश्विक मान्यता की ओर बढ़ रही हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
ये स्थल मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाते हैं।
राज्य में कई अन्य ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जो इसकी विरासत को और समृद्ध बनाते हैं। इनके नाम भेड़ाघाट, चंबल घाटी की रॉक आर्ट साइट, धमनार गुफाएं और अशोक के शिलालेख हैं। ये स्थल इतिहास के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग विरासत संरक्षण के साथ-साथ विकास पर भी जोर दे रहे हैं। हेरिटेज सर्किट, आधुनिक सुविधाएं और संरक्षण परियोजनाएं पर्यटकों को बेहतर अनुभव दे रही हैं।
राज्य में कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जैसे:
ये योजनाएं विरासत को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
‘श्रीराम वन गमन पथ’ एक प्रमुख हेरिटेज सर्किट है, जो 9 जिलों के 23 स्थलों को जोड़ता है। यह सिर्फ पर्यटन मार्ग नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और इतिहास की यात्रा है।
आज विरासत स्थलों के सामने कई चुनौतियां हैं...
कई बार पर्यटक खुद भी इन स्थलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे इनकी सुंदरता और महत्व प्रभावित होता है।