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बुरहानपुर में जर्जर रास्ता : मरीज को पैदल उठाकर ले जाने की मजबूरी, खेतों में कर रहे अंतिम संस्कार

खकनार तहसील के ग्राम डवाली रैयत में खेतों और गांव को मुख्य मार्ग व हाईवे से जोड़ने वाला रास्ता वर्षा में बदहाल हो गया है। करीब दो से ढाई महीने तक रास्...और पढ़ें

By Ashwin RathoreEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 06:00:12 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 06:00:12 PM (IST)
बुरहानपुर में जर्जर रास्ता : मरीज को पैदल उठाकर ले जाने की मजबूरी, खेतों में कर रहे अंतिम संस्कार
रास्ता इस तरह बदहाल है कि कीचड़ में बैल गाड़ी भी फंसी जाती है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. डवाली रैयत में रास्ते की बदहाली से जनजीवन बेहाल
  2. खेतों तक पहुंचना मुश्किल, बच्चे भी प्रभावित
  3. करीब दो से ढाई महीने तक रास्ते पर कीचड़ रहता है

नईदुनिया न्यूज, शेखपुरा (बुरहानपुर)। खकनार तहसील के ग्राम डवाली रैयत में खेतों और गांव को मुख्य मार्ग व हाईवे से जोड़ने वाला रास्ता वर्षा में बदहाल हो गया है। करीब दो से ढाई महीने तक रास्ते पर कीचड़ जमा रहने से ग्रामीणों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

किसानों का कहना है कि इसी रास्ते से वे खेतों तक पहुंचने के साथ कृषि उपज मंडी तक ले जाते हैं। रास्ता खराब होने से खाद-बीज और जरूरी सामान भी से पहले ही लाना पड़ता है। ग्रामीण कैलाश धारवे ने बताया कि रास्ते को लेकर कई बार शिकायत की, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई।


रास्ते की समस्या जस की तस है

कई सरपंच और सचिव आए और चले गए, लेकिन रास्ते की समस्या जस की तस है। कैलाश चौहान ने कहा कि किसानों के लिए यही मुख्य रास्ता है। वर्षा में मोटरसाइकिल तो दूर, पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। राजू डुडवा ने बताया कि खराब रास्ते का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।

कीचड़ में किताबें लेकर बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल है

कीचड़ में किताबें लेकर बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल है। कुछ बच्चों को मजबूरी में दूर होस्टल में रखना पड़ रहा है। बलराम ने बताया कि बीमार व्यक्ति को करीब तीन-चार किलोमीटर तक ले जाने के बाद ही एंबुलेंस या वाहन मिल पाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी स्थिति चिंताजनक है।

वर्षों से इस रास्ते पर एंबुलेंस तक नहीं पहुंची

बहादुर भाई कलमे ने कहा कि वर्षों से इस रास्ते पर एंबुलेंस तक नहीं पहुंची। रास्ते की परेशानी के कारण करीब 70 से 90 लोगों के मकान खेतों में बने हैं और कई परिवार बारिश के दौरान झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर होते हैं।ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में बांका बाई गाठ्या तड़ोकर की मौत के बाद खराब रास्ते के कारण शव को श्मशान तक ले जाना मुश्किल हुआ और खेत में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। ग्रामीणों ने तहसीलदार और कलेक्टर से मौके पर पहुंचकर रास्ते का निरीक्षण कर स्थायी समाधान कराने की मांग की है।

पंचायत में मिला ताला

रास्ते की समस्या को लेकर पंचायत भवन पहुंचने पर ताला लगा मिला। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत दो दिन से बंद है। सरपंच का मोबाइल भी स्विच आफ बताया गया।ग्रामीण जुगन तड़ोकर, शालिकराम, जोरदार चंगड, मालसिंग, हरसिंग बाथु, श्रीराम कलमे, गणेश डुडवा, कमल, बलीराम, शिवा, संजय सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से बारिश में भी आवागमन योग्य रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है।

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