छतरपुर में एंबुलेंस ड्राइवर की मनमानी, ग्वालियर के बदले झांसी छोड़ा; इलाज के दौरान नाबालिग की मौत
पोस्टमार्टम के दौरान रोते-बिलखते पिता मुकेश कुशवाहा ने कहा कि यदि समय पर उनका बेटा ग्वालियर पहुंच जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 05:45:46 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 05:48:16 PM (IST)
पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद स्वजन। नईदुनियाHighLights
- ग्वालियर के बजाय झांसी ले गया एंबुलेंस ड्राइवर
- सरकारी एंबुलेंस न मिलने पर निजी वाहन से गए थे परिजन
- परिजनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और निजी एंबुलेंस ड्राइवर की कथित धोखाधड़ी ने सटई थाना क्षेत्र के ग्राम हिम्मतपुर निवासी 16 वर्षीय कमलेश कुशवाहा की जान ले ली।
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल किशोर को डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर किया था, लेकिन एंबुलेंस ड्राइवर उसे ग्वालियर ले जाने के बजाय झांसी के एक निजी अस्पताल में छोड़कर रफूचक्कर हो गया। वहां बुधवार को इलाज के दौरान कमलेश ने दम तोड़ दिया।
नाबालिग को बाइकवाले ने मारी थी टक्कर
जानकारी के अनुसार हादसा 13 सितंबर को रिक्शे से उतरते समय अज्ञात बाइक ने कमलेश को टक्कर मार दी थी। अस्पताल की लापरवाही जिला अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद गंभीर हालत देखकर डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर किया। एंबुलेंस न मिलन स्वजन का आरोप है कि घंटों इंतजार के बाद भी सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली, जिससे वे निजी एंबुलेंस करने पर मजबूर हुए।
गुरुवार को छतरपुर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान रोते-बिलखते पिता मुकेश कुशवाहा ने कहा कि यदि समय पर उनका बेटा ग्वालियर पहुंच जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। स्वजन ने एंबुलेंस ड्राइवर पर सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।